18 दिसंबर, 2009

प्रेमवती, महिला बिजली मिस्त्री

जब भी हमारे घर पर किसी बिजली के उपकरण में नुक्स आता है तो आम तौर पर हम इलेक्ट्रीशियन यानी बिजली के मिस्त्री को बुलाते हैं. लेकिन हम आपको बताते हैं एक महिला बिजली मिस्त्री के बारे में.
महिला बिजली मिस्त्री सुनने में थोड़ा हैरान तो करता है लेकिन लखनऊ की प्रेमवती सोनकर ये काम पिछले पैंतीस वर्षों से कर रही हैं.

बासठ साल की प्रेमवती को बचपन से बिजली की झालरें और उपकरण आकर्षित करते थे. उनकी भी इच्छा होती थी कि काश वो ये काम सीख पातीं.

नैनीताल की रहने वाली प्रेमवती की शादी हुई लखनऊ के प्यारे लाल से जिन्हें बिजली के काम की अच्छी खासी जानकारी थी. प्यारे लाल लखनऊ में ही जल संस्थान में कर्मचारी थे.

शादी के बाद प्रेमवती दिन भर घर पर खाली बैठी रहती थीं. घर के आर्थिक हालात भी कुछ ठीक नहीं थे. ऐसे में प्रेमवती ने अपने पति को बिजली के उपकरणों की मरम्मत करने का सुझाव दिया.


दुकान पर एक महिला का बैठना किसी को भी पसंद नहीं आता था. लेकिन पति के सहयोग से धीरे-धीरे सब ठीक हो गया




इस तरह उन्होंने एक दुकान खोल ली और प्रेमवती खाली समय में उनका हाथ बंटाने लगीं.

पति के हौसले से प्रेमवती के बचपन का शौक कब हुनर में बदल गया इसका एहसास उन्हें ख़ुद भी न हुआ.

रोटी बेलने वाले हाथ जल्दी ही मोटर की वाइंडिंग और बिजली के दूसरे साज़ो-सामान बनाने लग गए.

अब तो उन्हें बिजली के करंट का झटका और रोटी बेलते वक्त हाथ का जलना एक ही जैसा लगता है.

30 नवंबर, 2009

ग्रीन बैल्ट और इंडस्ट्रियल बैल्ट में एक अनुपात जरूरी है

जंगल कर सकते हैं मंगल... पर मैं समझता हूं कि ग्रीन बैल्ट और इंडस्ट्रियल बैल्ट में एक अनुपात जरूरी है , बस्तर के जंगल बंबई का प्रदूषण दूर नही कर सकते , न ही दक्षिण अफ्रिका के जंगल अमेरिकी औद्योगीकीकरण का मुकाबला कर सकते हैं .. हर क्षेत्र का समानुपातिक विकास होना चाहिये . वन संरक्षण के नाम पर अपना नाम कमाने के लिये टी एन शेषन ने इंद्रावती नदी पर बोधघाट विद्युत उत्पादन परियोजना के निर्माण को बस्तर में अनुमति नही दी थी जिसका खामियाजा आज म.प्र. विद्युत की कमी से जूझ कर कर रहा है .. यह ठीक नही है

23 नवंबर, 2009

न्यूज़....

बिजली के बिना भी मोबाइल फोन चार्ज किया जा सकेगा।

भोपाल के आर्मी जवान अनुराग कुमार ने धूप और आग से बैटरी चार्ज करने वाला चार्जर तैयार किया है। इससे बिजली के बिना भी मोबाइल फोन चार्ज किया जा सकेगा। इसकी खासियत यह भी है कि बल्ब या आग की आंच में भी बैटरी चार्ज कर सकता है। यह एक बोल्ट से लेकर 6 बोल्ट तक की क्षमता वाले सभी मोबाइल बैटरिज को ऑटोमेटिक एडजस्ट से चार्ज कर सकता है। इसे तैयार करने में 600 रुपए का खर्च आया और यदि इस चार्जर का बड़े स्तर पर निर्मा‡ा किया जाए तो महज 80 से 100 रुपए की कीमत में उपलŽध हो सकता है। अनुराग ने बताया कि यह चार्जर आम चार्जर की तुलना में aद्यt146यादा समय लेता है मगर इसके उपयोग से बैटरी की लाइफ दोगुनी हो जाती है। आम चार्जर 802 एमएएच की स्पीड पर काम करते हैं, वहीं इसकी स्पीड 300 एमएएच तक रखी गई है।
अब अनुराग की तम‹ना लैपटॉप के लिए सौर ऊर्जा युक्त चार्जर और डीटीएच को इसी तकनीक से चलाने के लिए उपकर‡ा तैयार करने का मन है।

बैक्टीरिया रोशन करेंगे शहर

बैक्टीरिया रोशन करेंगे शहर

वास्तुविद्एक ऐसे शहर का सपना देख रहे हैं, जहाँ आकाश सफेद और नीले प्रकाश से जगमगा रहा हो, जो कार्बन सोखता हो और रोशनी के लिए मछलियों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया का इस्तेमाल कर रहा हो। ....मुकुल व्यास



जरा कल्पना कीजिए ऐसी जीवित इमारतों की जो कार्बन डाई ऑक्साइड का भोजन करती हों। ऐसी सड़कों की कल्पना करें, जो बैक्टीरिया की रोशनी से जगमगाती हों। यह साइंस फिक्शन नहीं है। यह जलवायु परिवर्तन के कारण बदलते हुए विश्व का एक नजारा है। तापमान वृद्धि और बर्फ पिघलने के बाद अब धीरे-धीरे स्पष्ट होता जा रहा है कि प्रकृति को अपनी इच्छानुसार मोड़ने की कोशिशें कारगर नहीं होंगी। जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के लिए विभिन्ना विकल्पों पर कई स्तरों पर काम चल रहा है।

वास्तुविद एक ऐसे शहर का सपना देख रहे हैं, जहाँ आकाश सफेद और नीले प्रकाश से जगमगा रहा हो। ऐसा शहर जो कार्बन सोखता हो और रोशनी के लिए मछलियों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया का इस्तेमाल कर रहा हो। लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज की शोधकर्ता डॉ. रेशल आर्मस्ट्रांग का मानना है कि कम ऊर्जा की खपत के लिए बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये बैक्टीरिया नीली-हरी चमक पैदा करते हैं। इमारतों और साइन बोर्डों को चमकीले बैक्टीरिया की परतों से कवर किया जा सकता है। एक दूसरी दिलचस्प संभावना बैक्टीरिया को फोटोसिंथेसिस की प्रक्रिया से गुजारने की है ताकि वे कार्बन डाई ऑक्साइड हजम कर सूरज की रोशनी को ऊर्जा में तब्दील कर सकें। वैज्ञानिकों ने फोटोसिंथेसिस के लिए बैक्टीरिया की कई किस्मों की पहचान की है। डॉ. रेशल आर्मस्ट्रांग की शोधकर्ता टीम वायुमंडल से कार्बन डाई ऑक्साइड सोखने के लिए सायनोबैक्टीरिया यानी ग्रीन एलगी के इस्तेमाल की संभावना पर भी विचार कर रही है।

आर्मस्ट्रांग और उनके सहयोगी जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए प्रकृति से एक और गुर सीखना चाहते हैं। यह है चूने के निर्माण का रहस्य। इस प्रक्रिया में वायुमंडलीय कार्बन डाई ऑक्साइड ठोस कार्बोनेट रूप में तब्दील हो जाती है। कुदरती तौर पर यह प्रक्रिया हजारों वर्ष में पूरी होती है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले वायुमंडलीय कार्बन डाई ऑक्साइड तेजाबी वर्षा जल में घुलती है और फिर कैल्शियम के साथ मिलकर ठोस कैल्शियम कार्बोनेट अथवा लाइमस्टोन में तब्दील हो जाती है। वैज्ञानिकों की टीम इस कुदरती प्रक्रिया को कृत्रिम रूप से दोहराना चाहती है और चूना बनाने की प्रक्रिया को हजारों वर्ष के बजाय कुछ ही दिनों में पूरा करना चाहती है। रिसर्चरों का मानना है कि दीवारों पर इंजन में प्रयुक्त होने वाले ग्रीज की नन्ही बूँदों की परत बिछाकर यह काम आसानी से किया जा सकता है। ग्रीज में मैग्नीशियम क्लोराइड जैसा कोई साल्ट मिलाया जाएगा। जब मैग्नेशियम हवा में मौजूद कार्बन डाई ऑक्साइड से क्रिया करता है तो मैग्नीशियम कार्बोनेट के ठोस मोती बनने लगते हैं। धीरे-धीरे ये मोती सफेद चमकीले क्रिस्टल में तब्दील होने लगते हैं। ये परतें कुछ ही दिनों में बर्फबारी जैसा आभास देंगी। इस प्रक्रिया में न सिर्फ इमारत का सौंदर्य बढ़ेगा बल्कि आवारा घूम रहे कार्बन को भी मुट्ठी में किया जा सकेगा।

21 नवंबर, 2009

21 अक्तूबर, 2009

CALCULATE YOUR ELECTRICITY CONSUMPTION & BILL

CALCULATE YOUR ELECTRICITY CONSUMPTION & BILL
5.1 How the Tariff is determined?
The Commission under the powers conferred upon it by the Electricity Act, 2003 and also in the previous legislations determines the tariff for the licensees as well as for various categories of the consumers. The tariff determination process is an open and transparent process. The licensees are required to file their Annual Revenue Requirement (ARR) based on the expenses required for generation/procurement of power, its transmission and distribution to the end user. The data submitted by the licensees are published through a public notice and the stakeholders are invited to submit their comments/suggestions. The Commission thereafter conducts public hearings in the matter and seeks the objections/suggestions from the stakeholders which include consumers or consumer related organizations. The Commission is also assisted by expert consultants in diligent/prudent scrutiny of the financial & technical data submitted by the licensees. After such prudent checks, the Commission carries out the act of balancing the requirement of the companies and the revenues that are to be received from different categories of consumers and determines the tariff. A conscious effort is made to balance the interest of consumers and the licensees.

5.2 How to check monthly energy consumption?
Consumer can calculate approximate monthly consumption based on the connected load and usage hours. It is important to know how much the supplier is supposed to charge you per unit (kWh) of the electricity you consume. If you do not know, you can enquire from your distributor or you can visit the MPERC web site (www.mperc.org) for information. To understand how much you have been charged that month you will need to refer slab wise charges and calculate total charges from your monthly consumption. For example

Category Upto 30 units up to 50 units
Domestic Rs. 2.65 Rs. 2.90

Following table gives a fair indication of load of various equipments and the consumption vis-à-vis the usage time:

Appliances Wattage Monthly consumption of electricity in units
(KWH) Duration for consumption of one unit by using the appliance.
One hour per day Six hours per day
Bulb 25 0.75 4.5 40 hours
40 1.2 7.2 25 Hours
60 1.8 10.8 16 Hours 40 Minutes
100 3 18 10 Hours


Appliances Wattage Monthly consumption of electricity in units
(KWH) Duration for consumption of one unit by using the appliance.
C.F.L.
7 0.21 1.26 143 Hours
11 0.33 1.98 90 Hours 55 Minutes
13 0.39 2.34 77 Hours
27 0.81 4.86 37 Hours
Fluorescent
Tube Light 48" With copper choke 55 1.65 9.9 18 Hours 11 Minutes
With Electronic Choke 35 1.05 6.3 28 Hours 34 Minutes
Night Lamp 15 0.45 2.7 66 Hours 40 Minutes
Ceiling Fan 36"/48" 50 1.5 9 20 Hours
56" 60 1.8 10.8 16 Hours 40 Minutes
60" 70 2.1 12.7 14 Hours 17Minutes
Table Fan 12"/16" 40 1.2 7.2 25 Hours
Electric Press Domestic 450/700 13.5 to 21 81 to 136 2 Hours 13 Minutes to
1 Hour 25 Minutes
Dhobi 1000 30 180 1 Hour
Immersion Rod 1000 30 180 1 Hour
Geyser Capacity 15-50 Lit. 2000 60 360 30 Minutes
Instant 3000 90 540 20 Minutes
A.C. 1 Ton 1400 42 252 43 Minutes
1.5 Ton 1800 54 324 33 Minutes
Air Cooler 170 5.1 30.6 5 Hours 53 Minutes
Refrigerator Small 225 2 Units per day
Big 300 4 Units per day
Toaster 800 24 144 1 Hour 15 Minutes
Hot Plate
1000/1500 30 to 45 180 to 270 1 Hour to 40 Minutes
Electric Kettle 1000/2000 30 to 60 180 to 360 1 Hour to 30 Minutes
Mixer - Juicer (Big) 450 13.5 81 2 Hours 13 Minutes
Washing Machine Automatic 325/1000 9.75 to 30 58 to 180 3 Hours 5 Minutes to 5 Hours
Semi-automatic 200 6 36 5 Hours
Vacuum Cleaner 700-750 21 to 22.5 126 to 135 1 Hour 26 Minutes to
1 Hour 20 Minutes
Radio 15 0.45 2.7 66 Hours 40 Minutes
Tape Recorder 20 0.6 3.6 50 Hours
T.V. 60 to 120 1.8 to 3.6 10.8 to 21.6 16 Hours 40 Minutes to
8 Hours 20 Minutes
Video 40 1.2 7.2 25 Hours
Mosquito Repellant 5 0.15 0.9 200 Hours
Water Purifier 25 0.75 4.5 40 Hours
Computer 100 to 150 3 to 4.5 18 to 27 10 Hours to 6 Hours 40 Minutes

(Source: Publication by Bureau of Energy Efficiency, New Delhi)
Note:

1. Please note that the values of wattage ratings given in above table are given as a general guideline, however these ratings may differ for models of different makes.

2. Consumption of electricity can be measured on the basis of Kilowatt (KWH). One KWH is defined as one unit. Calculation of consumption in units can be worked out based on the Wattage rating of the machine multiplied by working hours and divided by 1000.

3. One unit electricity is consumed for lighting a 1000 watt bulb for one hour which can be measured as 1 KWH hour (1 KWH = 1 Unit of electricity)

5.3 How to calculate your monthly bill
You can calculate your electricity bill. See the following for Domestic, Non-domestic, Industrial and Agriculture category of LT consumers:

How the bill is prepared?

Madhya Pradesh Regulatory Commission has fixed the electricity Tariff on 29-07-2009 for the year 2009-10. You will now be receiving the bill as per the rates applicable from 6th August,2009. Please refer the table shown below, as your bill will be prepared as per the rates mentioned in the table.

A. DOMESTIC CATEGORY
S.No. Monthly consumption Energy charges (paise/unit) Fixed Charges Minimum charges
In Urban Area In notified Rural Area (Rs. per connection per month)
LV 1.1 – Consumption up to 30 Units per month
1 Up to 30 Units 265 Nil Nil 30
LV 1.2 – Consumption more than 30 Units per month (Telescopic benefit in energy charges for permanent connection)
1 Up to 50 Units (Applicable to consumers having consumption during the month in excess of 30 units) 290 Rs. 10 per connection per month Rs.5 per connection per month
2 51 to 100 units 330 Rs.20 per connection per month Rs.10 per connection per month 30
3 101 to 200 units 390 Rs. 40 for each 0.5 kW of authorised load per month Rs. 20 for each 0.5 kW of authorised load per month
4 Above 200 units 400 Rs. 45 for each 0.5 kW of authorised load per month Rs. 30 for each 0.5 kW of authorised load per month


S.No. Monthly consumption Energy charges (paise/unit) Fixed Charges Minimum charges
In Urban Area In notified Rural Area (Rs. per connection per month)
5 Temporary connection for construction of own house (max. up to one year) 500 Rs. 60 for each 0.5 kW of sanctioned load or connected load or recorded load which ever is highest per month Rs. 40 for each 0.5 kW of sanctioned load or connected load or recorded load which ever is highest per month 350
6 Temporary connection for social / marriage purposes and religious function 500 Rs. 5 for each 0.5 kW of sanctioned load or connected load or recorded load which ever is highest per day or part thereof Rs. 3 for each 0.5 kW of sanctioned load or connected load or recorded load which ever is highest per day or part thereof 350
7 Un-metered connection (in urban areas) For 77 units @ 305 30 - Nil
8 Un-metered connection For 30 units @ 265 - 10 Nil
(in rural areas )
9 Through DTR meter for clusters of Jhuggi/Jhopdi 245 Nil Nil Nil

B. NON-DOMESTIC CATEGORY
S. No. Sub category Energy charges (paise/ unit) Fixed charges in urban areas Fixed charges in rural areas Minimum Consumption
LV Category 2.1 The consumer shall guarantee a minimum annual consumption of 360 units per kW or part thereof of connected load or load as per agreement, whichever is higher or contracted load (in case of demand based charges), if supplied in urban areas and 240 units per kW or part thereof of connected load or load as per agreement, whichever is higher or contracted load (in case of demand based charges), if supplied in rural areas. However, the load of X-Ray unit shall be excluded while considering the connected load of the consumer for calculation of minimum consumption. The deficit unit (Minimum consumption –actual consumption) if any shall be billed at the applicable energy rate. Minimum charges in case of temporary connections for marriage purposes shall be Rs.500/-
1 Connected load based tariff 400 Rs. 40 per KW per month Rs. 20 per KW per month
2 OPTIONAL Demand based tariff for loads above 10KW* 400 Rs.120 per KW or Rs.96 per KVA of billing demand per month Rs.75 per KW or Rs. 60 per KVA of billing demand per month
LV Category 2.2
1 On all units for monthly consumption up to 50 units 465 Rs.20 per KW per month Rs.10 per KW per month


S. No. Sub category Energy charges (paise/ unit) Fixed charges in urban areas Fixed charges in rural areas Minimum Consumption
2 On all units for monthly consumption more than 50 units 505 Rs.40 per KW per month Rs.20 per KW per month The consumer shall guarantee a minimum annual consumption of 360 units per kW or part thereof of connected load or load as per agreement, whichever is higher or contracted load (in case of demand based charges), if supplied in urban areas and 240 units per kW or part thereof of connected load or load as per agreement, whichever is higher or contracted load (in case of demand based charges), if supplied in rural areas. However, the load of X-Ray unit shall be excluded while considering the connected load of the consumer for calculation of minimum consumption. The deficit unit (Minimum consumption –actual consumption) if any shall be billed at the applicable energy rate. Minimum charges in case of temporary connections for marriage purposes shall be Rs.500/-
3 OPTIONAL Demand based tariff for contract demand above 10 KW* 400 Rs.150 per KW or Rs.120 per KVA of billing demand per month Rs.90 per KW or Rs.72 per KVA of billing demand per month
4 Temporary connections including Multi point temporary connection at LT for Mela** 610 Rs.75 per KW or part thereof per month Rs.45 per KW or part thereof per month
5 Temporary connections for marriage purposes at marriage gardens or marriage halls or any other premises covered under LV2.2 category 610 Rs. 20 for each KW of sanctioned load or connected load or recorded load which ever is highest per day or part thereof Rs. 10 for each KW of sanctioned load or connected load or recorded load which ever is highest per day or part thereof
6 For X-Ray plant Additional fixed charges (Rs. per machine per month)
Single Phase 200
Three Phase 300
* Note: The Consumer shall have the option to avail demand based tariff
** Note: In case permission for organizing Mela is granted by Revenue Authorities of Govt. of MP

C. LT INDUSTRIAL
For Non seasonal and seasonal consumers
Category of consumers Fixed Charges (Rs. per month) – Urban Areas Fixed Charges (Rs. per month) – Rural Areas Energy Charges (paise per unit) – Urban / Rural Area
A. Non seasonal consumers
4.1 a LT industries up to 25 HP Rs. 45 per HP Rs.10 per HP 325
4.1b Demand based tariff (up to 100 HP) Rs. 132 per kVA or Rs 165 per kW per month of billing demand Rs. 50 per kVA or Rs 60. per kW per month of billing demand 415
4.1c Demand based tariff (Above 100 HP & up to 150 HP*) (For existing consumers only) Rs 176 /kVA or Rs.220 / kW per month of billing demand Rs 176 /kVA or Rs.220 / kW per month of billing demand 430
4.1 d Temporary connection 1.3 times of the applicable tariff



Category of consumers Fixed Charges (Rs. per month) – Urban Areas Fixed Charges (Rs. per month) – Rural Areas Energy Charges (paise per unit) – Urban / Rural Area
B Seasonal Consumers (period of season shall not exceed 180 days continuously). If the declared season or off-season spreads over two tariff periods, then the tariff for the respective period shall be applicable.
4.1 e During season Normal tariff as for Non seasonal consumers Normal tariff as for Non seasonal consumers Normal tariff as for Non seasonal consumers
4.1 f During Off -season Normal tariff as for Non-seasonal consumers on 10 % of contract demand or actual recorded demand, whichever is more Normal tariff as for Non-seasonal consumers on 10 % of contract demand or actual recorded demand, whichever is more 120 % of normal tariff as for Non-seasonal consumers
Note (a) * In addition, these consumers are also liable to pay transformation losses at 3% and transformer rent as per the order for Miscellaneous and general charges.
(b) Minimum Consumption::
For LT Industries in rural areas: The consumer shall guarantee a minimum annual consumption (kWH) of 240 units per HP or part thereof of contract demand irrespective of whether any energy is consumed or not during the year.
For LT Industries in urban areas: The consumer shall guarantee a minimum annual consumption (kWH) of 360 units per HP or part thereof of contract demand irrespective of whether any energy is consumed or not during the year.

D. AGRICULTURAL PUMPS
S. No. Sub-Category Monthly Fixed charges Energy charges (Paise per unit)
a) First 300 units per month NIL 250
b) Rest of the units in the month NIL 300
c) Temporary connections NIL 350
d) DTR metered group consumers NIL 225
Basis of billing of energy of un-metered consumption:
Assessment of un-metered consumption shall be done in the following manner from Aug. 09 onwards:-

RURAL AREAS

Un-metered agriculture consumers using three phase motors
Permanent connections @ 40 units per HP of the sanctioned load per month for the months of Aug & September and 120 units per HP of the sanctioned load per month for the months from October to March.
Temporary connections @ 155 units per HP of the sanctioned load per month.
Un-metered agriculture consumers using single phase motors
Permanent connections @ 50 units per HP of the sanctioned load per month for the months of Aug & September and 130 units per HP of the sanctioned load per month for the months from October to March.
Temporary connections @ 170 units per HP of the sanctioned load per month.

URBAN AREAS

Un-metered agriculture consumers using three phase motors
Permanent connections @ 70 units per HP of the sanctioned load per month for the months of Aug & September and 150 units per HP of the sanctioned load per month for the months from October to March.
Temporary connections @ 175 units per HP of the sanctioned load per month.
Un-metered agriculture consumers using single phase motors
Permanent connections @ 70 units per HP of the sanctioned load per month for the months of Aug & September and 170 units per HP of the sanctioned load per month for the months from October to March.
Temporary connections @ 190 units per HP of the sanctioned load per month.

Minimum Consumption
: -

For Metered agricultural consumers: The consumer shall guarantee a minimum consumption of 15 units per HP or part thereof of connected load per month for the months from April to September and 45 units per HP or part thereof of connected load per month for the months from October to March irrespective of whether any energy is consumed or not during the year.

Specific Conditions for DTR metered consumers
a. All the consumers connected to the DTR shall pay the energy charges for the units worked out based on their actual connected load.
b. All the consumers will be required to execute agreement with their Licensee to this effect

5.4 Incentives for installation of energy saving devices subject to satisfaction of licensee
(i) Installation of Pump sets with ISI motor 15 paisa per units
(ii) Installation of pump sets with ISI motor with PVC pipes & foot valve. 30 paisa per units
(iii) Installation of pump sets with ISI motor with PVC pipes & foot valve and capacitor 45 paisa per units

E. GENERAL NOTE FOR ALL CATEGORIES: Other than the charges specified in foregoing tables for various categories, consumers are also liable to pay the following charges:
1) Electricity Duty (Fixed by the State Government)
2) Energy development surcharge ( CESS) (Fixed by the State Government)
3) Meter rent (Fixed by MPERC)
4) Surcharge on delayed payment; other charges like welding surcharge, capacitor surcharge etc. wherever applicable.
5) Please see booklet on tariff order for the 2009-10 for full details of various terms and conditions.

5.4 How to reduce your electricity bill and conserve energy?
We all know Electricity as a means to save ourselves from the effect of heat during summer. With proper use of efficient appliances, we may reduce our electricity bills by reducing demand of electricity. In this direction, the Commission has advised the Distribution companies to use Energy Efficient Appliances in their Offices. In the wider interest of consumers and for their general information, following measures are suggested, which will enable the consumers not only to reduce their electricity bills, but to help in conserving the precious energy thereby the State in controlling the electricity demand.

WHAT TO DO WHAT NOT TO DO
Lighting & Fans

 As far as possible, use work oriented lighting while reading. Use reading lamps, which will give you focused light and will not illuminate the room.
 Use energy efficient tubes or Compact Fluorescent Lamps (CFL) which save you up to 70% of electricity. As compared to ordinary Bulb, the CFL gives you 8 times the illumination. One 15 Watt CFL illuminates equivalent to a 60 Watt Bulb.
 Use electronic Choke in place of an ordinary Choke.
 Remove the dust particles deposited on the Bulbs and Tube rods from time to time. The dust particles reduce the intensity of light.
 As far as possible make use of Sunlight and use lighter shades of paints on the walls.
 Use Energy-Smart Fans in rooms where these are required to be run continuously. Use Electronic Regulators for fans.
 Keeping the switch ON when there is no requirement of electricity.
 Using ordinary filament Bulbs, especially in places like lobby/passage/toilet. Please note that in the ordinary filament Bulbs, 90% of energy is wasted towards heat and only 10% used for illumination.
 Using old Regulators in Fans.
 Using non ISI low quality appliances.
 Always keeping the lights and fans ON while going out of the room.
Refrigerators

 The motors and compressors of the Refrigerators emit continuous heat; therefore, keep provision for continuous flow of air around. The distance between the Refrigerator and wall should be at least 30 cms.
 Before opening the door of the Refrigerator, keep in mind all the articles required to be taken out for use. This will enable you to keep its door open for a minimum period & reduce consumption
 Carry out the regular check for leakages in the Refrigerator and ensure that the Rubber seal of the Refrigerator is absolutely clean and tight. If a piece of paper is kept between the seal and the body of the Refrigerator and if it does not come out on pulling, then the seal is OK. If it comes out on pulling, change the seal immediately.
 Keep the thermostat of the Refrigerator on minimum setting. Always use Bureau of Energy Efficiency (BEE) labelled Star Rated Refrigerators.  Keeping Refrigerators very close to the wall.
 Allowing dust particles to accumulate on the Refrigerator condenser. Please note that the efficiency of the motors is reduced due to accumulation of dust on condenser which in turn enhances electricity consumption.
 Not defrosting the Freezer regularly. Please note that the Ice deposited on the freezer of manual Defrost Refrigerator through insulation on the coil reduces its power of cooling the articles, thereby enhancing the consumption of electricity.
 Keeping hot articles and food items directly in the Refrigerator, thereby wasting the energy.
 Opening the door of the Refrigerator very frequently.


WHAT TO DO WHAT NOT TO DO
Air Conditioner (AC)

 As far as possible, make use of ceiling fan or table fan or cooler for protection from heat because with the use of fan, consumption of electricity is worth 30 paise per hour, with that of cooler it is worth Rs. 3.00 per hour whereas with the use of Air Conditioners it is worth Rs. 10.00 per hour.
 A high quality Air Conditioner cools your room just in 30 minutes. Please make use of the timer and keep the Air Conditioner off for some time.
 If the Air Conditioner has become too old and needs frequent repairs, it is better to purchase a new Air Conditioner. Always use Bureau of Energy Efficiency (BEE) Star Rated Labelled Air Conditioners.  Adjustment of Temperature of Air Conditioner below 27º C. Keep in mind that the electricity could be saved to the extent of 3 to 5 % per degree Centigrade fall in temperature.
 Keeping the doors and windows of the room open when Air Conditioner is being used.
 Never cleaning the filters of the Air Conditioner.

18 अक्तूबर, 2009

बधाई ... मैने आज से २४ बरस पहले जो योजना कागज पर बनाई थी , अब वह लेगी मूर्त रूप

सीएफएल से रोशन होगा प्रदेश

जबलपुर। प्रदेश का हर घर अब सीएफएल की रोशनी से जगमगाएगा। इसके लिए तीनों कंपनियों में कवायद शुरू की गई है। फिलहाल सबसे पहले मध्य क्षेत्र कंपनी में लागू किया गया है व इसी महीने शेष दोनों कंपनियों में भी बचत लैंप योजना को लागू करने की तैयारी की जा रही है।

इस योजना के अंतर्गत उपभोक्ता अपने ४०, ६० और १०० वॉट के बल्बों के बदले १०, १५ और २० वॉट के सीएफएल बदल सकते हैं और एवज में १५ रुपए प्रति सीएफएल देना होगा। सोमवार को मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल ने ग्रीन पाइंट एनर्जी लिमिटेड जयपुर के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान कंपनी की ओर से मुख्य अभियंता वाणिज्य एसए अंसारी और ग्रीन पाइंट की ओर से निदेशक नीलेश गुप्ता मौजूद रहे। इस योजना के लागू होने से भोपाल व ग्वालियर क्षेत्र के १६ लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे।

पूर्व क्षेत्र में भी इसी महीने होगी लागू- मध्यप्रदेश मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में भी बचत लैंप योजना को लागू करने की तैयारी कर ली गई है और इसके लिए अक्टूबर में ही एमओयू साइन कर लिए जाएंगे। वहीं पश्चिम क्षेत्र में भी योजना को शीघ्र लागू करने के प्रयास किये जा रहे हैं।

बचत लैंप योजना को पूर्व क्षेत्र कंपनी में इसी माह से लागू किया जाएगा और कंपनी से शीघ्र ही एमओयू साइन किए जाएंगे।

14 अक्तूबर, 2009

Who is MPERC?

1.1 Who is MPERC?
The Madhya Pradesh Electricity Regulatory Commission was constituted by the Government of Madhya Pradesh, Department of Energy under the power vested in Section 17(7) (3) of Electricity Regulatory Commissions Act, 1998 (No 4 of 1998), vide notification No 5726-F-3-20- Thirteen-98, Bhopal dated 18th August 1998
Subsequently the State Government enacted the Madhya Pradesh Vidyut Sudhar Adhiniyam, 2000 (No 4 of 2001) which was made effective from 3rd July 2001. This Act gave wide ranging powers to the Commission on licensing, tariff determination and powers to issue Codes and Regulations, as may be necessary to perform its functions.
A comprehensive legislation was enacted by the Govt. of India in the form of the Electricity Act, 2003. This Act has introduced several new provisions and mandates several new functions and responsibilities on the State Electricity Regulatory Commissions. The Electricity (Amendment) Act, 2007 has made changes to some of the provisions of the Electricity Act, 2003. Provisions with regard to unauthorized use/ theft of electricity have been made more stringent.



1.2 Functions of MPERC
Subject to the provisions of Electricity Act, 2003, the Commission shall discharge, amongst others, the following functions, namely:
 Determine the tariff for generation, supply, transmission and wheeling of electricity, wholesale, bulk or retail, as the case may be, within the State:
 Regulate electricity purchase and procurement process of distribution licensees including the price at which electricity shall be procured from the generating companies or licensees or from other sources through agreements for purchase of power for distribution and supply within the State;
 Facilitate intra-state transmission and wheeling of electricity;
 Issue licenses to persons seeking to act as transmission licensees, distribution licensees and electricity traders with respect to their operations within the State;
 Promote co-generation and generation of electricity from renewable sources of energy by providing suitable measures for connectivity with the grid and sale of electricity to any person, and also specify, for purchase of electricity from such sources, a percentage of the total consumption of electricity in the area of a distribution licence;
 Adjudicate upon the disputes between the licensees, and generating companies and to refer any dispute for arbitration;
 Specify State Grid Code consistent with the Central Grid Code
 Specify or enforce Standards with respect to quality, continuity and reliability of service by licensees;
 Fix the trading margin in the intra-State trading of electricity, if considered, necessary; and
 The State Commission shall advise the State Government on all or any of the following matters, namely :
o promotion of competition, efficiency and economy in activities of the electricity industry;
o promotion of investment in electricity industry;
o reorganization and restructuring of electricity industry in the State;
o matters concerning generation, transmission , distribution and
o Trading of electricity or any other matter referred to the State Commission by that Government.


1.3 Powers of the Commission
The Commission shall, for the purpose of any inquiry or proceeding under this Act, have the powers as are vested in a Civil Court under the Code of Civil Procedure,1908 (5 of 1908) while trying a suit, in the following matters:
 Summoning and enforcing of attendance of any witness and examination on oath;
 Discovery and production of any document or other material object producible as evidence;
 Reception of evidence on affidavits;
 Requisition of any public record from any court or office;
 Issue of commission for examination of witnesses;
 Review of its decisions, directions and orders and
 Any other matters which may be prescribed by the State Government.

Regulatory decisions affect the public and consumers at large, particularly decisions related to tariffs, access and quality of supply, new generation and licence applications. It is a legal requirement that the decision-making process should be fair and transparent.
All decisions, directions and orders of the Commission shall be in writing and shall be supported by reasons. The decisions, directions and orders of the Commission including those of the dissenting member, unless otherwise specified by the Commission, shall be available for inspection by any person and copies of the same shall be made available in a manner the Commission may prescribe.


1.4 Constitution of the Commission
The State Govt. forms a selection committee headed by a person who has been a Judge of the High Court. The Chief Secretary of the State & Chairperson of CEA or Central Commission are the other members of the selection committee to select the Chairman and Members of the State Regulators. MPERC consists of one Chairman and two Members. The Chairman works as a Chief Executive of the Commission. The Chairperson and the Members of the State Commission shall be persons of ability, integrity and standing who have adequate knowledge of, and have shown capacity in, dealing with problems relating to engineering, finance, commerce, economics, law or management.
The Regulator is supported by Directors, Joint Directors and Deputy Directors backed up by functional experts in the economic, technical, financial, legal, research, policy development, human resources, IT & stakeholder management and consumer services areas.
1.5 Consumer Advocacy Cell
The Commission has formed a “Consumer Advocacy Cell” in its office. The Cell is headed by Consultant (LR) of the Commission.


His Mobile Number for providing assistance to the consumers is 9425010821.


The main functions of Consumer Advocacy Cell are:
(i) To empower consumers to participate effectively in the regulatory process.
(ii) To represent consumers on all matters relating to power sector.
(iii) To act as a source of information to the consumers on the issues of electricity.
(iv) To arrange Workshops and Training Programmes for Consumer Advocacy Groups/NGOs/SHGs.
(v) To publish News-letters, fact-sheets and other informative materials.
(vi) To handle grievances and complaints of electricity consumers received in the Commission and to arrange to conduct survey and publish reports on the issues related to consumer services.
(vii) To disseminate information through use of TV Media, Radio and Print Media.
(viii) To work as an interface between the Commission and the consumers and bring out relevant issues to the knowledge of the Commission for protection of consumers’ interests.



























A2: HOW MPERC HELPS YOU AS AN ELECTRICITY CONSUMER
2.1 Ensure quality supply and faster dispute resolution through Regulations
The commission has notified the following Regulations to ensure quality and reliability in supply of electricity by the licensee with performance guarantee standards to take care of the consumers’ interests and at the same time defined different charges to be paid by the consumers for the services given by the licensee for a viable commercial business.
‘Madhya Pradesh Electricity Supply Code’:
This Code provides conditions to govern supply and retail sale of electricity by the licensees and procedures thereof, the powers, functions and obligations of the licensees and the rights and obligations of consumers, and matters connected therewith and incidental thereto. In brief it prescribes about the service conditions between the licensee and the consumers.
‘Distribution performance standards’:
The objective of this regulation is as follows:
 To ensure that the Distribution System’s performance meets a minimum guaranteed standard which is essential for the consumer’s installation to function properly.

 To enable the consumer to design their systems and equipments to suit the electrical environment that they operate in.

 To enhance the quality of standards of the Distribution System and services to meet acceptable standards in the short term and gradually move towards improved standards in the long term.

 This regulation empowers consumers to get compensation for under performance by licensee.

‘Security Deposit Regulation’:

To ensure recovery of reasonable security deposit in line with the provision of the Electricity Act, 2003 from the consumers, the Commission has prescribed the detailed procedure and quantum of the security deposit to be collected from the various consumer categories:

 Licensee may collect Security Deposit from all consumers in respect of the meters, line and plant provided for the connection and supply of energy.

 The Security Deposit shall be accepted in the form of cash or bank draft only. Cheques will be acceptable only subject to the condition that supply will be possible to commence only on realization of cheque.

‘Establishment of Forum and Ombudsman for grievance redressal’:
The MPERC recognizes the urgency and need for enhancing the levels of services to the electricity consumers in the State. It accords high importance to the rights of consumers. Keeping in view the objective of safeguarding consumers’ interests, the Commission has directed in the Regulations to establish the Electricity Consumers’ Grievance Redressal Forum and Electricity Ombudsman for redressal of grievances. At present there are three Forums, one each at Bhopal, Indore and Jabalpur at the Head Quarters of Distribution Licensees. The Ombudsman is having his office at the MPERC. The Forums & Ombudsman also visit places other than their HQ to reach to the consumers to solve their grievances.
The consumer has the right to complain about the quality of service rendered by the licensee. If the consumer is not satisfied with the outcome or the manner in which the complaint is handled by the licensee, the consumer may refer the matter to the Forum and if he is still not satisfied with Forum’s decision then he can make an appeal to the Ombudsman for settlement of his grievance.
Grievance Redressal Forums handle complaints including:
 Quality of supply
 Billing and accounting queries
 Quality of service

अब म.प्र. में भी बिजली क्षेत्र में उपभोक्ता संगठनो की भागीदारी होगी १४.१०.०९ को भोपाल में संपन्न हुई एक कार्यशाला ....



कार्यशाला की अध्यक्षता की विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री बोस ने , भागीदारी की विशेष वक्ता जागो ग्राहक जागो के श्री बिजान मिश्रा ने , श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ,श्री मृदुल खरे ..नियामक आयोग के अधिकारियो ने , प्रदेश भर से आये अनेक स्वैछिक संगठनो के प्रतिनिधियो ने ,

04 सितंबर, 2009

निजी पनबिजली संयंत्र

मध्य प्रदेश को साल 2011 तक पहला निजी पनबिजली संयंत्र मिल जाएगा। राज्य के रायसेन जिले में बरना सिंचाई परियोजना लगाई जाएगी।

राज्य सरकार ने साल 2006 में ही अपनी छोटी पनबिजली परियोजना नीति की घोषणा की थी। तब से लेकर अभी तक यह पहली परियोजना होगी। सरकारी अधिकारियों ने बताया, 'बरना हाइडिल पावर प्रोजेक्ट लिमिटेड नाम की निजी कंपनी ने राज्य के सिंचाई विभाग के साथ बिजली परियोजना के लिए 10 करोड़ रुपये का करार किया है।'

इस परियोजना के जरिए लगभग 1.9 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। राज्य में छोटी पनबिजली परियोजनाओं की संभावनाओं को भुनाने के लिए सरकार ने 2006 में इसके लिए निजी निवेशकों को आकर्षित करने की योजना बनाई थी। देश भर में छोटी पनबिजली परियोजनाओं से लगभग 1693 मेगावॉट बिजली का उत्पादन किया जाता है। लेकिन इसमें राज्य की हिस्सेदारी 2.42 फीसदी ही है।

राज्य सरकार की इस नई नीति के तहत 5 मेगावॉट से 25 मेगावॉट क्षमता की परियोजनाओं को छोटी पनबिजली परियोजना ही माना जाएगा। इसके तहत कंपनी अकेले भी परियोजना शुरू कर सकती है और संयुक्त उपक्रम में भी।

परियोजनाओं को 30-40 महीनों में बूट आधार पर विकसित किया जाएगा। राज्य बिजली नियामक आयोग द्वारा तय की गई दरों पर बिजली खरीदने से मना करने का पहला अधिकार राज्य बिजली बोर्ड और उसकी वितरण और विपणन कंपनियों के पास ही होता है। सूत्रों ने बताया, 'छोटी पनबिजली परियोजनाओं के लिए लगभग 6-7 निजी कंपनियों ने आवेदन किया हुआ है।'

19 अगस्त, 2009

गांवों में ट्रांसफारमर स्तर पर उपभोक्ता सहकारी समिति बनाकर उस समिति को विद्युत वितरण कंपनी कनेक्शन दे।......

गांवों में ट्रांसफारमर स्तर पर उपभोक्ता सहकारी समिति बनाकर उस समिति को विद्युत वितरण कंपनी कनेक्शन दे।......


प्रायः गांवो से बिजली बिल वसूल न होने की शिकायत वितरण कंपनी के अधिकारियो को रहती है ..
मेरा सुझाव है कि यदि गांवों में ट्रांसफारमर स्तर पर उपभोक्ता सहकारी समिति बनाकर उस समिति को विद्युत वितरण कंपनी कनेक्शन दे,और उस ट्रांसफारमर के रखरखाव , व उससे दिये जाने वाले अस्थाई सिंचाई कनेक्शनो की जबाबदारी अग्रिम अनुमानित भुगतान के आधार पर इन समितियों को सौपी जावे तो गांवो से बिल वसूली के आशातीत परिणाम मिल सकते है ..अग्रिम भुगतान हेतु शासन या कृषि बैंक आदि समिति को सहयोग कर सकते हैं ,समिति के सदस्य उप मीटर लगाकर या अपने खेतो की भुमि या उपयोग की जानी वाली बिजली की पम्प या मोटर अथवा बल्ब की अश्व शक्ति के अनुसार परस्पर बिल बांट सकते है .. व ट्रांसफारमर पर लगाये गये मीटर के आधार पर बिजली विभाग एक बिन्दु पर समिति को बिलिग कर अनेक समस्याओ से बच सकता है .
चूकि गावो मे बिजली अत्यंत कम दर पर प्रदान की जाती है व वहां बिजली प्रदान करना व्यापारिक दृष्टि से तो लाभकारी नही है पर सामाजिक जबाबदारी व कृषि के लिय बेहद जरूरी है अतः स्वल्प संसाधनो से जूझ रहे वितरण कंपनी के लिये यह प्रोग उपयोगी हो सकता है ..आशा है कि मेरे सुझाव पर विचार किया जावेगा ...

13 अगस्त, 2009

मुख्य मंत्री श्री शिवराज चौहान को उनके सकारात्मक कदम के लिये बधाई ......

बिजली की कमी के मुद्दे पर म.प्र. के मुख्य मंत्री जी ने अनुकरणीय पहल करते हुये न केवल अपनी सरकार के एअर कंडीशनर बंद करवा दिये वरन निओन लाइट के विज्ञापन भी प्रतिबंधित कर दिये हैं.. जनता से भी बिजली बचाने की अपील की है ...इस वर्ष स्वल्प वर्षा के चलते जल विढ़्युत ही नही थर्मल पावर भी कम ही बन पायेगी क्योकि शीतलीकरण के लिये जरूरी पानी भी पावर स्टेशन में जलाशयो में नही भर पाया है ....मेरे ब्लाग पर मै पिछली पोस्टों में लगातार लिखता रहा हूं कि वर्तमान बिजली संकट से निकलने का एकमात्र तरीका परमाणु विद्युत गृहो का निर्माण ही है ...अमेरिका से हुये विगत समझौते के बाद भी अब तक कोई परमाणु बिजली घर पर कार्ठ क्यो प्रारंभ नही किया जा रहा ?????? जो भी हो फिलहाल मुख्य मंत्री श्री शिवराज चौहान को उनके सकारात्मक कदम के लिये बधाई ......

12 अगस्त, 2009

पर्यावरण के प्रति चेतना ...




पर्यावरण के प्रति चेतना ... श्री एल .एन. उपाध्याय जी ने इस बरसात में सारे अधिकारियो कर्मचारियो को बार बार प्रेरित कर कंपनी के खाली भुभाग में खूब पौधे लगाये और लगवाये .. ..श्रीमती उपाध्याय ने भी साथ निभाया ..

10 जून, 2009

जबलपुर शहर में शुरू हुई स्पॉट बिलिंग...एल एन उपाध्याय


  • जबलपुर शहर में शुरू हुई स्पॉट बिलिंग

    पहले मीटर की रीडिंग लेने उपभोक्ता के घर जाना, फिर बिल घर पहुंचाने की जिम्मेदारी, इस दोहरी व्यवस्था में होने वाली समय की बर्बादी को देखते हुए पूर्व क्षेत्र कंपनी ने अब स्पॉट बिलिंग की नई व्यवस्था शहर में लागू की है। इसके अंतर्गत एक डिवीजन में बतौर प्रयोग इसे अमल में लाया गया है।

    बिजली उपभोक्ताओं को मैन्यूअल काम के दौरान आने वाली शिकायतों को दूर करने के लिए सिटी सर्किल की साउथ डिवीजन में स्पॉट बिलिंग का काम प्रयोग बतौर शुरू किया गया है और अगर यह कार्य सफल सिद्ध होता है, तो इसे सभी जगह लागू किया जाएगा। फिलहाल इस काम के लिए बेंगलुरू की एक निजी कंपनी को ठेका दिया गया है, जिसके कर्मचारी उपभोक्ताओं के घर-घर जाकर स्पॉट बिलिंग कर रहे हैं। साउथ डिवीजन के लगभग पांच हजार उपभोक्ताओं के नए बिल बंटना शुरू हो गए हैं।

    हैंडी कंप्यूटर निकालेगा बिल

    इस सुविधा के तहत घर पहुंचने वाले कर्मचारी के हाथ में एक हैंडी कंप्यूटर होगा, जिसमें उपभोक्ता के बिल संबंधी पूरी जानकारी फीड होगी। सिर्फ नई १रीडिंग भरकर एक बटन दबाते ही नया बिल मौके पर ही जारी हो जाएगा। नए सिस्टम के तहत कर्मचारी पुरानी रीडिंग से छे़ड़छा़ड़ नहीं कर पाएगा, इससे मीटर में दर्शाई गई रीडिंग भरने के बाद ही नया बिल जारी होगा।

    बदला बिल का साइज

    अब तक घर पहुंचने वाले एक पेज के बिल साइज को भी अब बदल दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब बिल मीटर स्लिप के रूप में होगा, जिसमें संपूर्ण जानकारी दी गई है।

    शहर में स्पॉट बिलिंग का काम साउथ डिवीजन में शुरू किया गया है, सब कुछ ठीक रहा तो इसे सभी जगह लागू किया जाएगा।


    एल एन उपाध्याय
    एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी
    jabalpur

24 मार्च, 2009

बचत लैंप योजना

lighting energy efficiency programme in MPPKVVCL under the “Bachat Lamp Yojna” of
Bureau of Energy Efficiency, Ministry of Power, and Government of India.
The Discom East, as a part of the Demand Side Efficiency initiative, intends to
implement the energy efficiency programme for promotion of energy efficiency in
lighting system of the residential household consumers in its area based on the
parameters laid down by Bureau of Energy Efficiency, Govt. of India under “Bachat
Lamp Yojna” (BLY).
BLY seeks replacement of the incandescent bulbs with energy efficient CFLs
at nominal prices as prescribed by the BEE, Ministry of Power. The project shall be
developed as a CDM project as per the UNFCC guidelines and the Program of
Activities designed by BEE in India. The balance cost of the CFLs shall be recovered
from the CER revenues to be generated from the project and Discom shall not bear
any financial liability for the same.
Discom shall provide the database of the entire residential house holds (about
18 Lakhs) consumers in 20 districts of proposed project area under the scheme. It
shall also provide all other information as may be required for development of the
project as per UNFCCC guidelines and the Bachat Lamp Yojana provisions
The proposal for participation is sought from the BEE empanelled parties for
developing this CDM project as per the approved methodology of the UNFCCC &
shall address the complete project activity. It shall include the following:
 Project implementation strategy.
 Time schedule for implementing the project.
 Technical specification of CFLs.
 Percentage of carbon credits sharing with Discom.
 Details of past experience in the field of CDM or of such project
activity, if any.
Prospective CDM project developers empanelled by BEE shall have the
following activities to be undertaken under the project,
 Shall develop the project development of CDM programme
activity design documents,
 Obtain approval from National CDM Authority,
 Supply CFL at the price allowed in the Yojna,
 Complete formalities required for obtaining CERs such as
registration and validation,
 Collect fused CFLs through buy-back scheme and arrange for
their safe disposal,
 Free replacement of CFL during the life of project and safe
keeping of replaced ICB for independent inspection, as per the
guidelines of the BLY of BEE.
The project participants – MPPKVVCL, Project Developer & BEE – shall
have a clear role defined for each of them as per the tripartite agreement to be signed
among these parties. The Discom East will not bear any financial burden for the
development of the project activity and the complete project costs shall be borne by
the project developer only.

23 मार्च, 2009

सौर शहरों का विकास

सौर शहरों का विकास

श्रीमती कल्पना पालकीवाला*

भारत के कई शहरों और कस्बों में विद्युत मांग में 15 प्रतिशत की वृध्दि हो रही है। तेजी से बढती ऌस मांग के परिणामस्वरूप, ज्यादातर शहर और कस्बे भारी विद्युत कटौती का सामना कर रहे हैं। इसलिए, ऊर्जा मांग का प्रबंध करना स्थानीय सरकारों और नगर निगमों के लिए एक प्राथमिक कार्य बन गया है। इसलिए, एक ऐसी कार्य योजना को विकसित किए जाने की आवश्यकता है जिससे ऊर्जा संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण और प्रणाली के माध्यमों को अपनाकर कार्बन उत्सर्जन की अत्यधिक मात्रा में कमी लाने के अतिरिक्त पारंपरिक ऊर्जा खपत में कमी लायी जा सकती है। इसके अनुसार, न्न सौर शहरों का विकास न्न पर एक कार्यक्रम तैयार किया जा चुका है जिसके तहत शहरी क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा के प्रयोग हेतु नगर निगमों को अपने शहरों को सौर शहरों के तौर पर विकसित करने की तैयारी और एक कार्ययोजना के कार्यान्वयन में सहायता प्रदान करना है।

उद्देश्य

इस कार्यक्रम के उद्देश्यों में शहरी स्थानीय निकायों को शहर स्तर पर ऊर्जा चुनौतियों से निबटने में सक्षम बनाना, निकायों को ढांचागत योजना प्रदान करना और उसमें मदद करना, वर्तमान ऊर्जा स्थिति, भविष्यगत की मांग और कार्य योजनाओं के निर्धारण सहित प्रमुख योजना की तैयारी करना, निकायों की क्षमता को बढाना और नागरिक समाज के सभी वर्गो के बीच जागरूकता जगाना, योजना प्रक्रिया में विभिन्न पणधारकों को शामिल करना और सार्वजनिक-निजी साझेदारी के माध्यम से दीर्घकालीन ऊर्जा विकल्पों के कार्यान्वयन की देखभाल करना शामिल है।

भौतिक लक्ष्य-

11वीं योजनावधि में, कुल 60 शहरों को न्न सौर शहरों न्न के तौर पर विकसित किये जाने का प्रस्ताव है। मंत्रालय द्वारा एक राज्य में कम से कम एक शहर से लेकर अधिकतम पाँच शहरों को मदद प्रदान की जाएगी। इस कार्यक्रम में शामिल शहरों की जनसंख्या 5 लाख से ज्यादा और 50 लाख से कम होगी।

प्रमुख गतिविधियां-

इस कार्यक्रम को मंत्रालय द्वारा स्वीकृत तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर मुख्य योजना की तैयारी के माध्यम से शहर स्तर पर दीर्घकालीन ऊर्जा को प्रदान करने में सामने आने वाली चुनौतियों को हल करने के आधार पर तैयार किया गया है। मुख्य योजना को संकेतात्मक दिशानिदेर्शो के अनुसार तैयार किया गया है जिससे अगले 10 वर्षो के लिए संपूर्ण और क्षेत्रवार ऊर्जा मांग और आपूर्ति प्रदान की जायेगी। इसके अलावा, यह शहर में ऊर्जा उपयोग और ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन के बारे में एक संपूर्ण क्षेत्रवार आधार व्यवस्था भी प्रदान करेगा। मुख्य योजना में ऊर्जा संरक्षण के वर्षवार लक्ष्य, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाऊस गैसों की कमी के साथ कार्य योजना के कार्यान्वयन को स्पष्ट रूप से सामने लाया जायेगा। वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों क्षेत्र के संदर्भ संगठनों से अनुदान के संभावित स्रोतों की पहचान की जाएगी। चयनित प्रतिनिधि, स्थानीय अनुसंधान और शैक्षिक संस्थान, निवासी कल्याण संस्थाएं, औद्योगिक और कॉरपोरेट संगठन, गैर सरकारी संगठन, एसएनए आदि की प्रस्तुति के साथ अंतिम रूप देने से पूर्व, मुख्य योजना पर पणधारक सलाहकार कार्यशाला में विचार विमर्श किया जाएगा। मुख्य योजना में वर्तमान स्तर से 10 प्रतिशत तक की ऊर्जा खपत और कार्बन उत्सर्जन में कमी का न्यूनतम लक्ष्य रखा जाएगा।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत शहर परिषद में न्न सौर शहर प्रकोष्ठ न्न का गठन भी शामिल है जिसमें योजना और कार्यान्वयन के लिए वरिष्ठ प्रशासक और शहर अभियंता होगें। नगर निगम निकायों , स्थानीय अनुसंधान, शैक्षिक संस्थान, निवासी कल्याण संस्था, औद्योगिक और कॉरपोरेट संगठन, गैर सरकारी संगठन, राज्य क्षेत्रीय एजेन्सियां और अन्य संबंध्द पणधारकों की प्रस्तुति के साथ सलाहकार सहायता के लिए एक न्न सौर शहर पणधारक समिति का गठन किया जाएगा।

विभिन्न पणधारकों जैसे नगर निगम निकायों , नगर निगम अधिकारियों, वास्तुकारोंअभियंताओं, भवननिर्माताओं, वित्तीय संस्थानों,गैर सरकारी संगठनों, तकनीकी संस्थानों, उत्पादक और आपूर्तिकर्ताओं, निवासी कल्याण संस्थाओं आदि के चयनित प्रतिनिधियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, व्यापारिक बैठकें, जागरूकता शिविर आदि और भारत में अध्ययन यात्राओं का आयोजन करना।

कार्बन वित्तपोषण के लिए प्रस्ताव तैयार करना तथा प्रिंट इलेक्ट्रोनिक मीडिया के जरिए प्रचार प्रसार एवं जनजागरूकता अभियान चलाना भी इस कार्यक्रम का हिस्सा होगा।

वित्तीय प्रावधान

हर नगर या शहर के लिए 50 लाख रुपये तक का वित्तीय प्रावधान होगा। यह राशि उस शहर की जनसंख्या तथा संबंधित नगर परिषदप्रशासन द्वारा उठाये गये कदमों पर निर्भर करेगी।

· मास्टर प्लान बनाने हेतु एक साल के अंदर 10 लाख रुपये तक का अनुदान

· पांच साल के दौरान क्रियान्वयन की निगरानी के लिए 10 लाख रुपये तक का अनुदान

· सौर सेल की स्थापना तथा पांच वर्षों तक उसकी क्रियाशीलता के लिए 10 लाख रुपये तक का प्रावधान

· शेष पांच लाख रुपये पांच साल के अन्य प्रोत्साहन कार्यों के लिए

इस मंत्रालय की विभिन्न स्कीमों के प्रावधानों के मुताबिक विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण लगाने के लिए उपभोक्ता को पूंजीइंटरेस्ट सब्सिडी दी जाएगी। स्कीम प्रावधानों के अनुसार विभिन्न अन्य गतिविधियों के लिए भी सहायता दी जाएगी। सक्षमता वाले शहर के रूप में चिन्हित शहरों को सहायता में प्राथमिकता दी जाएगी। इन शहरों को इस मंत्रालय, आईआरईडीए तथा नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणोंप्रणालियों के इस्तेमाल को बढावा देने में जुटे अन्य संस्थानों द्वारा प्राथमिकता वाले माने जायेंगे। एसएनए भी अपने शहरों में विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणप्रणाली लगाने के लिए मंत्रालय से उनकी विभिन्न स्कीमों के तहत सब्सिडी के जरिए ऊंचे लक्ष्य आवंटित करने का अनुरोध कर सकती है।

शहरों के चयन की कसौटी

इस कार्यक्रम के तहत उच्च स्तर की कटिबध्दता तथा नेतृत्व कौशल वाले शहरों को उत्साहवर्ध्दन किया जाता है। मंत्रालय शहरों को चयन करते वक्त निम्नलिखित बातों पर ध्यान देती है। शहर की जनसंख्या, क्षेत्रीय अवस्था एवं क्षेत्र में महत्त्व, नवीकरणीय ऊर्जाओं को अपनाने में राजनीतिक एवं प्रशासनिक कटिबध्दता (सौर शहर कार्यक्रम में वर्णित गतिविधियां को क्रियान्वित करने के लिए नगर परिषदप्रशासन द्वारा पारित किया जाने वाला प्रस्ताव), ऊर्जा संरक्षण एवं नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने के लिए उठाये गये विनियामक कदम, शहरी गतिविधियों में ऊर्जा संरक्षण तथा नवीकरणीय ऊर्जा अपनाये जाने की क्षमता, नगर परिषदप्रशासननिजी विकार्सकत्ता, उद्योगआमलोगों द्वारा ऊर्जा संरक्षण एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढावा देने के लिए पहले ही उठाये कये गदम, आम लोगों को शामिल करने में तथा हितधारकों के साथ काम करने में शहरी स्थानीय निकाय का अनुभव तथा इस कार्यक्रम के तहत शुरू की गयी गतिविधियों को संसाधन तथा स्थायित्व प्रदान करने का इरादा।

प्रस्तावों की सुपुर्दगी तथा धनराशि जारी

नगर परिषद द्वारा निर्धारित प्रपत्र में प्रस्ताव राज्य नोडल एजेंसी के जरिए जमा किये जायेंगे। प्रस्तावों की मंत्रालय में जांच की जायेगी और इसके आधार पर, योजना के क्रियान्वयन पर सलाह मशविरा के लिए गठित स्वतंत्र पैनल द्वारा अनुशंसित सीएफए का 50 प्रतिशत मंजूर परियोजनाओं के लिए जारी किया जाएगा तथा बाकी राशि काम के निष्पादन तथा धनराशि के इस्तेमाल के आधार पर जारी की जाएगी।

पुरस्कार व्यवस्था

चिन्हित सौर शहरों को वार्षिक पुरस्कार स्वरूप वैजयंतीप्रमाणपत्र प्रदान किये जाते हैं। नगर परिषदप्रशासन शहर को सौर शहर के रूप में विकसित करने के लिए उठाये गये कदमों की जानकारी प्रदान करता है और इसी आधार पर पुरस्कार दिये जाते हैं।

माडल सौर शहर

अन्य शहरों को सौर शहर के रूप में विकसित होने के लिए मंत्रालय उनके सम्मुख उदाहरण के तौर पर दो शहरों को सौर शहर के रूप में विकसित करेगा। इन मॉडल सौर शहरों में हरेक को इस स्कीम के तहत तैयार मास्टर प्लान कार्यान्वित करने के लिए मंत्रालय से अधिकतम साढे 9 क़रोड़ रुपये की वित्तीय मदद दी जाएगी। मंत्रालय तथा संबंधित नगर निगमनगर प्रशासनराज्य सरकार व्यय का आधा-आधा हिस्सा वहन करेगी। धनराशि तब जारी की जायेगी जब मॉडल सौर शहर के रूप में विकसित किये जाने के लिए चिन्हित शहर अपना मास्टर प्लान जमा करेगा, इसके लिए उपरोक्त नियमानुसार अलग से मदद दी जायेगी। यदि शहर को माडल सौर शहर के रूप में विकसित करने के लिए 19 करोड़ रुपये की धनराशि मंत्रालय से साढे 9 क़रोड़ रुपये तथा संबंधित नगर निगमनगर प्रशासनराज्य सरकार से भी साढे 9 क़रोड़ रुपये) प्रर्याप्त नहीं होती है तो उक्त शहर इस धनराशि के अलावा नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली लगाने के लिए मंत्रालय की अन्य मौजूदा योजनाओं से मदद ले सकता है जहां नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली उपकरण की संख्याक्षमता पर मौजूदा सीमा लागू नहीं है।

# उप निदेशक, पसूका, नई दिल्ली

21 मार्च, 2009

पुलिस पर बिजली चोरी का आरोप है।

मुंबई पुलिस अपराधियों को पकड़ने के साथ खुद भी चोरी का काम शुरू कर चुकी है। पुलिस पर बिजली चोरी का आरोप है। यह नायाब तरीका मुंबई में करीब 88 पुलिस चौकियों में वर्षों से आजमाया जा रहा है। एक चौकी तो ऐसी है कि 2001 से अब तक सिर्फ सात यूनिट ही खर्च कर पाई है।मुंबई पुलिस के मरीन ड्राइव ट्रैफिक पुलिस चौकी पर एक विज्ञापन बोर्ड 2001 से लगा है। इसमें 2001 से इलेक्ट्रिक सप्लाई दी जा रही है लेकिन तब से अब तक यह मीटर मात्र सात यूनिट ही बता रहा है। आई के चौगानी ने इस विज्ञापन बोर्ड को लेकर एक अपील बंबई हाईकोर्ट में डाली है। अपील में उन्होने कहा है कि करीब तीन-चार सप्ताह से मैं मरीन ड्राईव चौकी के मीटर को देख रहा हूं वह सात यूनिट ही है। जबकि यहां पर विज्ञापन बोर्ड दिन-रात रौशन रहता है। इसलिए मुझे शक है कि बिजली की यहां चोरी की जा रही है। चौगानी ने मुंबई के अन्य पुलिस चौकियों पर भी आरोप लगाया है कि शहर में कई पुलिस चौकियां अवैध रूप से स्ट्रीट लाइट और ट्रैफिक सिग्नल से बिजली की चोरी कर इस्तेमाल कर रही है।इस अपील के जवाब में बेस्ट के सहायक जेनरल मैनेजर अशोक वासुदेव ने कहा कि वह मीटर एक आउटडोर कंपनी के नाम पर लगाया गया था लेकिन इस अपील के बाद हमने मीटर बदल दिया है और पुराने मीटर को जांच के लिए भेज दिया गया है। यहीं नहीं इसमें 88 पुलिस चौकियों की लंबी फेहरिस्त है जो कि बिजली की चोरी करते हैं। इनमें से 42 चौकियों के खिलाफ कदम उठाये गए हैं, इन चौकियों में अवैध रूप से बिजली का उपयोग किया जा रहा था और 16 चौकियां ऐसी थी जो कि बिना मीटर के बिजली का उपयोग रहीं थीं।

09 मार्च, 2009

स्वीडन फिर बनाएगा परमाणु बिजली

स्वीडन फिर बनाएगा परमाणु बिजली

फिर सक्रिय होंगे परमाणु रिएक्टर यूरोपीय संघ के कई सदस्यों ने स्वीडन के फिर से परमाणु बिजली बनाने के फ़ैसले पर एतराज़ जताया है. स्वीडन ने 30 साल की पाबंदी के बाद परमाणु रिएक्टर फिर खोलने की बात कही है.

यूरोपीय देशों को चिंता इस बात की लगी है कि स्वीडन के फ़ैसले से पूरे महाद्वीप में एक ग़लत संदेश जा सकता है. जहां एक तरफ़ परमाणु रिएक्टरों को बंद करने की बात चल रही है, वहीं दूसरी तरफ़ स्वीडन तीस साल बाद परमाणु बिजली पर लगी पाबंदी हटा रहा है. यूरोपीय संघ में ग्रीन पार्टी की सांसद जर्मनी की रेबेका हार्म्स इसे स्कैंडल बता रही हैं.

यूरोपीय संघ के सदस्य स्वीडन में जनमत संग्रह के बाद 1980 में ही तय किया गया कि वहां परमाणु रिएक्टर बंद होंगे और परमाणु बिजली की पैदावार भी धीरे धीरे ख़त्म हो जाएगी. हालांकि लगभग 30 साल बाद भी आधी से ज़्यादा बिजली परमाणु रिएक्टरों में ही पैदा की जाती है. सरकार ने दस रिएक्टरों को बदल देने का फ़ैसला किया है. ख़ुद स्वीडन की विपक्षी पार्टियां भी इसका विरोध कर रही हैं.

लेकिन स्वीडन सरकार का कहना है कि आर्थिक मंदी के इस दौर में उसके फ़ैसले से रोज़गार बढ़ेगा और निवेश को भी बढ़ावा दिया जा सकेगा. प्रधानमंत्री फ़्रेडरिक राइनफ़ेल्ड्ट का मानना है कि कुछ ख़तरों के बावजूद लोग परमाणु बिजली में भरोसा रखते हैं और इस दिशा में सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा.

परमाणु बिजली से जुड़ा सबसे ख़तरनाक हादसा पूर्व सोवियत संघ के चेरोनबिल में हुआ था, जहां से ज़हरीली गैस लीक होने से कई लोगों की मौत हो गई थी और उसका असर अब तक देखा जाता है. इसके बाद से ही दुनिया भर में परमाणु रिएक्टरों को बंद करने की मुहिम चली थी. जर्मनी में भी दो हज़ार बीस तक इसे बंद करने का प्रस्ताव है. स्वीडन के इस फ़ैसले के बाद परमाणु

27 जनवरी, 2009

बिजली बचाने के कुछ और गुर

ओवन , प्रेस , वाशिंग मशीन का एकजाई उपयोग
ओवन , प्रेस , वाशिंग मशीन जैसे उपकणों की क्षमता के अनुरूप कार्य एकत्रित कर लें फिर एक ही बार में मशीन का पूरा आप्टिमम उपयोग करे . देखिये कि कितनी बिजली बची ?

खिड़कियों की काँच में ट्राँसपेरेंट फिल्म लगावें
घर की खिड़कियों के कांच में ट्रांस्पेरेंट फिल्म का उपयोग कर ४ल्ट्रावायलेट किरणौ को बाहर ही रोक दें , अनुभव कीजीये कि घर के तापमान में कितना अंतर होता है !

फाल्स सीलिंग
यदि घर में वातानुकूलन यंत्रो का उपयपग कर रहे हैं तो फाल्स सीलिंग अवश्य करवाइये , शीतलन का वाल्यूम कम होते ही बिजली का बिल भी कम हो जायेगा .

26 जनवरी, 2009

सीएफ़एल की जगह एलईडी बत्तियाँ

सीएफ़एल की जगह एलईडी बत्तियाँ

बत्ती निर्मता और शोधकर्ता इस समय और भी बेहतर विकल्पों की तलाश में हैं. संक्षेप में LED यानी Light Emitting Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift: प्रकाश उत्सर्जी डायोड वाली LED बत्तीDiode कहालाने वाले प्रकाश उत्सर्जी डायोड एक ऐसा ही विकल्प हो सकते हैं. अमेरिका में सैंटा बार्बरा विश्वविद्यालय के भौतिकशास्त्री शूजी नाकामूरा का कहना है कि LED वाली बत्तियां इस समय की बिजली बचतकारी बत्तियों की अपेक्षा दुगुनी कार्यकुशल हैं:

"प्रकाश उत्सर्जक डायोड की ऊर्जा-कार्यकुशलता बहुत ऊंची है--क़रीब 50 प्रतिशत. इसका मतलब है कि यह डायोड इस्तेमाल हुई बिजली की आधी मात्रा को प्रकाश में बदल देता है. LED बत्तियों की सहायता से हम कहीं ज़्यादा बिजली बचा सकते हैं."

एलईडी इलेक्ट्रॉनिक चिप है

प्रकाश उत्सर्जी डायोड अपने आप में एक छोटा-सा इलेक्ट्रॉनिक चिप है. चिप में से बिजली गुज़रते ही उसके इलेक्ट्रॉन पहले तो आवेशित हो जाते हैं और फिर, लगभग तुरंत ही, अपने आवेश वाली ऊर्जा को प्रकाश के रूप में उत्सर्जित कर देते हैं. इस तरह वे विद्युत ऊर्जा को प्रकाश ऊर्जा में बदलते हैं. स्टीरियो सिस्टम में हम जो छोटी-छोटी लाल-पीली़-हरी बत्तियां टिमटिमाते देखते हैं, वे प्रकाश उत्सर्जक डॉयोड ही हैं. शूजी नाकामूरा ने ही 1990 वाले दशक में सफ़ेद रोशनी देने वाले Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift: LED चिपप्रकाश उत्सर्जी डायोड के निर्माण की आधारशिला रखी. यही डायोड अब घरों और सड़कों को भी जगमग करेगाः

"प्रकाश उत्सर्जी डायोड लगभग अमर होते हैं, क़रीब एक लाख घंटे का उनका जीवनकाल होता है. एक साधारण बल्ब औसतन केवल एक हज़ार घंटे तक ही चल पाता है. लाइट डायोड उतने गरम भी नहीं होते, जितना एक बल्ब गरम हो जाता है. उनमें कोई पारा या कोई दूसरी विषैली चीज़ भी नहीं होती."

इधर कुछ वर्षों से बाज़ार में प्रकाश उत्सर्जी डायोड वाली LED हाथबत्तियां और साइकल की बत्तियां भी मिल रही हैं. लेकिन, ब्रेमेन के भौतिक वैज्ञानिक डेटलेफ़ होमल का कहना है कि वे अभी इतना तेज प्रकाश नहीं दे पातीं कि कारों या घरों में भी इस्तेमाल हो सकें:

"LED से कारों की हेडलाइट बनाने के लिए आख़िरी सीमा तक जाना पड़ेगा. यहाँ भौतिक विज्ञान की अभी कई चुनौतियाँ हमारे सामने हैं."

प्लास्टिक करेगा घरों को जगमग

प्रकाश उत्सर्जी डायोड वाली LED बत्तियाँ अभी बहुत मंहगी भी हैं. व्यापक इस्तेमाल लायक बनने के लिए उन्हें सस्ता होना पड़ेगा. इस बीच उनका भी एक विकल्प प्रयोगशालाओं में तैयार हो रहा है-- ऐसे प्रकाश उत्सर्जी प्लास्टिक अणु, जिन्हें Organic Light Emitting Diodes --OLED या केवल ओलेड भी कहते हैं. उनकी सहायता से बिल्कुल नये प्रकार की बत्तियाँ और लैंप बनाये जा Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift: प्लास्टिक का बना प्रकाश उत्सर्जी डायोड OLEDसकते हैं, जैसाकि कार्ल्सरूहे विश्वविद्यालय के भौतिक वैज्ञानिक ऊली लेमर बताते हैं:

"उनसे काफ़ी लंबे-चौड़े और मनचाहे आकार वाले ऐसे प्रकाश-स्रोत बन सकते हैं, जिन्हें घर की बनावट के साथ एकाकार किया जासके. उदाहरण के लिए, वे पूरी दीवार या पूरी छत तक फैले हो सकते हैं."

लेकिन, इस जगमगाहट के आने में अभी समय है हालाँकि ओलेड स्क्रीन वाले टेलीविज़न सेट बाज़ार में आ गये हैं:

"एक सबसे बड़ा सवाल है कि ओलेड वाले प्रकाश-स्रोत कितनी कम बिजली खा कर कितना अधिक प्रकाश देंगे और कितने टिकाऊ होंगे. उनका उत्पादन इतना सरल नहीं है कि उन्हें सस्ता कहा जा सके. उनका मुकाबला टॉमस एडीसन के उस बल्ब से है, जिसे एक सदी से अधिक समय से परिष्कृत और परिमार्जित किया जाता रहा है और जिसे अरबों की संख्या में बेहद सस्ते दाम पर बनाया जा सकता है."

दूसरे शब्दों में, जगमग करते प्लास्टिक वाली बत्तियां बाज़ार में आने में अभी एक-आध दशक लग जायेंगे.

अपराधों के नियंत्रण हेतु गाड़ियों की नम्बर प्लेट अलग न होने वाली हों..

हमेशा बिजली को लेकर ही लिखता रहता हूँ , विचार आया वाहनो के पंजियन पर तो उसे भी बाँट लूँ आप सब से .अपने माननीय मुख्य मंत्री जी ने http://www.ideasforcm.in/ नाम से एक बहुत ही बढ़िया शुरुवात की है , सो उन्हें भी यह विचार जमा कर रहा हूँ .
अपराधों के नियंत्रण हेतु गाड़ियों की नम्बर प्लेट अलग न होने वाली हों..अपराध नियंत्रण में वाहनो के रजिस्ट्रेशन नम्बर की भूमिका स्वस्पष्ट है .


ज्यादातर आतंकवादी गतिविधियाँ , हिट एण्ड रन एक्सीडेंटंल अपराध , वाहनों की चोरी , डकैती , कार में बलात्कार आदि आपराधों के अनुसंधान में प्रयुक्त वाहनों के रजिस्ट्रेशन नम्बर से पोलिस को बड़ी मदद मिलती है . वर्तमान में यह रजिस्ट्रेशन नम्बर एक दो या तीन स्क्रू से कसी हुई नम्बर प्लेट पर लिखा होता है . जिसे अपराधी बड़ी सरलता से निकाल फेंकता है या नम्बर प्लेट बदलकर चोरी की गाड़ी से अपराध को अंजाम देता है . मेरा सुझाव है कि इस पर नियंत्रण हेतु वाहन की चेसिस व बाडी पर ही निर्माता कम्पनी द्वारा फैक्टरी में ही रजिस्ट्रेशन नम्बर एम्बोसिंग द्वारा अंकित करने की व्यवस्था सरकारे तय करें . उस नम्बर का वाहन किस व्यक्ति द्वारा खरीदा गया यह विक्रय के बाद रजिस्ट्रेशन अथारिटी अपने कम्प्यूटर पर दर्ज कर रजिस्ट्रेशन शुल्क आदि लेकर दर्ज कर ले . इससे अपराधी सुगमता से वाहन का नम्बर नहीं बदल पायेंगे .सरकार को गाड़ी निर्माताओं को उनके उत्पादन के अनुरूप रजिस्ट्रेशन नम्बर पहले ही अलाट करने होंगे . इससे नये खरीदे गये अनरजिस्टर्ड वाहनों से घटित अपराधों पर भी नियंत्रण हो सकेगा .सरकारो के द्वारा वर्षो पुराने वाहन रजिस्ट्रेशन कानून में सामयिक बदलाव की इस पहल से गाड़ियों की चोरी में कमी के आंकड़े , अपराधों मे वाहनो के उपयोग में कमी के आंकड़े अपराध , आतंकवाद में कमी होगी, आम नागरिक , पोलिस व अन्य अपराध नियंत्रण संस्थायें राहत अनुभव करेंगी .

No more street light in Small Township

No more street light in Small Township
Providing very high heavy single light source, instead of street lights

In small industrial townships, instead of providing number of street lights, if the colony is developed in circular shape in such a way that the inner buildings are of less height than buildings of outer periphery, instead of providing street lighting, a single high mast powerful light source can be provided . It can save electricity , & colony may feel like day light even in nights… this is my idea.