10 जून, 2009

जबलपुर शहर में शुरू हुई स्पॉट बिलिंग...एल एन उपाध्याय

  • जबलपुर शहर में शुरू हुई स्पॉट बिलिंग पहले मीटर की रीडिंग लेने उपभोक्ता के घर जाना, फिर बिल घर पहुंचाने की जिम्मेदारी, इस दोहरी व्यवस्था में होने वाली समय की बर्बादी को देखते हुए पूर्व क्षेत्र कंपनी ने अब स्पॉट बिलिंग की नई व्यवस्था शहर में लागू की है। इसके अंतर्गत एक डिवीजन में बतौर प्रयोग इसे अमल में लाया गया है। बिजली उपभोक्ताओं को मैन्यूअल काम के दौरान आने वाली शिकायतों को दूर करने के लिए सिटी सर्किल की साउथ डिवीजन में स्पॉट बिलिंग का काम प्रयोग बतौर शुरू किया गया है और अगर यह कार्य सफल सिद्ध होता है, तो इसे सभी जगह लागू किया जाएगा। फिलहाल इस काम के लिए बेंगलुरू की एक निजी कंपनी को ठेका दिया गया है, जिसके कर्मचारी उपभोक्ताओं के घर-घर जाकर स्पॉट बिलिंग कर रहे हैं। साउथ डिवीजन के लगभग पांच हजार उपभोक्ताओं के नए बिल बंटना शुरू हो गए हैं। हैंडी कंप्यूटर निकालेगा बिल इस सुविधा के तहत घर पहुंचने वाले कर्मचारी के हाथ में एक हैंडी कंप्यूटर होगा, जिसमें उपभोक्ता के बिल संबंधी पूरी जानकारी फीड होगी। सिर्फ नई १रीडिंग भरकर एक बटन दबाते ही नया बिल मौके पर ही जारी हो जाएगा। नए सिस्टम के तहत कर्मचारी पुरानी रीडिंग से छे़ड़छा़ड़ नहीं कर पाएगा, इससे मीटर में दर्शाई गई रीडिंग भरने के बाद ही नया बिल जारी होगा। बदला बिल का साइज अब तक घर पहुंचने वाले एक पेज के बिल साइज को भी अब बदल दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब बिल मीटर स्लिप के रूप में होगा, जिसमें संपूर्ण जानकारी दी गई है। शहर में स्पॉट बिलिंग का काम साउथ डिवीजन में शुरू किया गया है, सब कुछ ठीक रहा तो इसे सभी जगह लागू किया जाएगा। एल एन उपाध्याय एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी jabalpur

07 जून, 2009

एक सुझाव बिजली से हटकर ..सड़क रेल यातायात को लेकर

रेल मंत्रालय को एक सुझाव "बिल्ड आपरेट एण्ड टैक्स "(B.O.T.) पद्धति पर रोड रेल क्रासिंगों पर ओवर ब्रिज बनाये जावें आज देश भर में ढ़ेरो लेवल क्रासिंग है , जहां रेलवे फाटक बंद होने से सड़क यातायात प्रभावित होता है . मेरा सुझाव है कि यदि इन लेवल क्रासिंगों पर "बिल्ड आपरेट एण्ड टैक्स "(B.O.T.) पद्धति से निजि निवेश से ओवर ब्रिज बनाये जावें तो सरकार का कोई व्यय नहीं होगा , उल्टे सुरक्षा निधि जमा करवाने से आय ही होगी . निजि निवेशक टर्न की आधार पर ओवर ब्रिजों का निर्माण करेंगे व टोल टैक्स के रूप में ापनी पूंजी व मुनाफा उन वानों से वसूल कर सकेंगे जो इन ओवर ब्रिज का उपयोग ापनी सुविधा हेतु करेगे .मंदी के इस दौर में इस तरह ढ़ेर से रोजगा , व इंफ्रास्ट्रक्चरल विकास हो सकेगा . लोगो को सुरक्षित व त्वरित यातायात सुलभ होसकेगा . आशा हे मेरा सुझाव उपयोगी होगा . विवेक रंजन श्रीवास्तव ०९४२५८०६२५२

24 मार्च, 2009

बचत लैंप योजना

lighting energy efficiency programme in MPPKVVCL under the “Bachat Lamp Yojna” of Bureau of Energy Efficiency, Ministry of Power, and Government of India. The Discom East, as a part of the Demand Side Efficiency initiative, intends to implement the energy efficiency programme for promotion of energy efficiency in lighting system of the residential household consumers in its area based on the parameters laid down by Bureau of Energy Efficiency, Govt. of India under “Bachat Lamp Yojna” (BLY). BLY seeks replacement of the incandescent bulbs with energy efficient CFLs at nominal prices as prescribed by the BEE, Ministry of Power. The project shall be developed as a CDM project as per the UNFCC guidelines and the Program of Activities designed by BEE in India. The balance cost of the CFLs shall be recovered from the CER revenues to be generated from the project and Discom shall not bear any financial liability for the same. Discom shall provide the database of the entire residential house holds (about 18 Lakhs) consumers in 20 districts of proposed project area under the scheme. It shall also provide all other information as may be required for development of the project as per UNFCCC guidelines and the Bachat Lamp Yojana provisions The proposal for participation is sought from the BEE empanelled parties for developing this CDM project as per the approved methodology of the UNFCCC & shall address the complete project activity. It shall include the following:  Project implementation strategy.  Time schedule for implementing the project.  Technical specification of CFLs.  Percentage of carbon credits sharing with Discom.  Details of past experience in the field of CDM or of such project activity, if any. Prospective CDM project developers empanelled by BEE shall have the following activities to be undertaken under the project,  Shall develop the project development of CDM programme activity design documents,  Obtain approval from National CDM Authority,  Supply CFL at the price allowed in the Yojna,  Complete formalities required for obtaining CERs such as registration and validation,  Collect fused CFLs through buy-back scheme and arrange for their safe disposal,  Free replacement of CFL during the life of project and safe keeping of replaced ICB for independent inspection, as per the guidelines of the BLY of BEE. The project participants – MPPKVVCL, Project Developer & BEE – shall have a clear role defined for each of them as per the tripartite agreement to be signed among these parties. The Discom East will not bear any financial burden for the development of the project activity and the complete project costs shall be borne by the project developer only.

23 मार्च, 2009

सौर शहरों का विकास

सौर शहरों का विकास श्रीमती कल्पना पालकीवाला* भारत के कई शहरों और कस्बों में विद्युत मांग में 15 प्रतिशत की वृध्दि हो रही है। तेजी से बढती ऌस मांग के परिणामस्वरूप, ज्यादातर शहर और कस्बे भारी विद्युत कटौती का सामना कर रहे हैं। इसलिए, ऊर्जा मांग का प्रबंध करना स्थानीय सरकारों और नगर निगमों के लिए एक प्राथमिक कार्य बन गया है। इसलिए, एक ऐसी कार्य योजना को विकसित किए जाने की आवश्यकता है जिससे ऊर्जा संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण और प्रणाली के माध्यमों को अपनाकर कार्बन उत्सर्जन की अत्यधिक मात्रा में कमी लाने के अतिरिक्त पारंपरिक ऊर्जा खपत में कमी लायी जा सकती है। इसके अनुसार, न्न सौर शहरों का विकास न्न पर एक कार्यक्रम तैयार किया जा चुका है जिसके तहत शहरी क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा के प्रयोग हेतु नगर निगमों को अपने शहरों को सौर शहरों के तौर पर विकसित करने की तैयारी और एक कार्ययोजना के कार्यान्वयन में सहायता प्रदान करना है। उद्देश्य इस कार्यक्रम के उद्देश्यों में शहरी स्थानीय निकायों को शहर स्तर पर ऊर्जा चुनौतियों से निबटने में सक्षम बनाना, निकायों को ढांचागत योजना प्रदान करना और उसमें मदद करना, वर्तमान ऊर्जा स्थिति, भविष्यगत की मांग और कार्य योजनाओं के निर्धारण सहित प्रमुख योजना की तैयारी करना, निकायों की क्षमता को बढाना और नागरिक समाज के सभी वर्गो के बीच जागरूकता जगाना, योजना प्रक्रिया में विभिन्न पणधारकों को शामिल करना और सार्वजनिक-निजी साझेदारी के माध्यम से दीर्घकालीन ऊर्जा विकल्पों के कार्यान्वयन की देखभाल करना शामिल है। भौतिक लक्ष्य- 11वीं योजनावधि में, कुल 60 शहरों को न्न सौर शहरों न्न के तौर पर विकसित किये जाने का प्रस्ताव है। मंत्रालय द्वारा एक राज्य में कम से कम एक शहर से लेकर अधिकतम पाँच शहरों को मदद प्रदान की जाएगी। इस कार्यक्रम में शामिल शहरों की जनसंख्या 5 लाख से ज्यादा और 50 लाख से कम होगी। प्रमुख गतिविधियां- इस कार्यक्रम को मंत्रालय द्वारा स्वीकृत तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर मुख्य योजना की तैयारी के माध्यम से शहर स्तर पर दीर्घकालीन ऊर्जा को प्रदान करने में सामने आने वाली चुनौतियों को हल करने के आधार पर तैयार किया गया है। मुख्य योजना को संकेतात्मक दिशानिदेर्शो के अनुसार तैयार किया गया है जिससे अगले 10 वर्षो के लिए संपूर्ण और क्षेत्रवार ऊर्जा मांग और आपूर्ति प्रदान की जायेगी। इसके अलावा, यह शहर में ऊर्जा उपयोग और ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन के बारे में एक संपूर्ण क्षेत्रवार आधार व्यवस्था भी प्रदान करेगा। मुख्य योजना में ऊर्जा संरक्षण के वर्षवार लक्ष्य, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाऊस गैसों की कमी के साथ कार्य योजना के कार्यान्वयन को स्पष्ट रूप से सामने लाया जायेगा। वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों क्षेत्र के संदर्भ संगठनों से अनुदान के संभावित स्रोतों की पहचान की जाएगी। चयनित प्रतिनिधि, स्थानीय अनुसंधान और शैक्षिक संस्थान, निवासी कल्याण संस्थाएं, औद्योगिक और कॉरपोरेट संगठन, गैर सरकारी संगठन, एसएनए आदि की प्रस्तुति के साथ अंतिम रूप देने से पूर्व, मुख्य योजना पर पणधारक सलाहकार कार्यशाला में विचार विमर्श किया जाएगा। मुख्य योजना में वर्तमान स्तर से 10 प्रतिशत तक की ऊर्जा खपत और कार्बन उत्सर्जन में कमी का न्यूनतम लक्ष्य रखा जाएगा। इस कार्यक्रम के अंतर्गत शहर परिषद में न्न सौर शहर प्रकोष्ठ न्न का गठन भी शामिल है जिसमें योजना और कार्यान्वयन के लिए वरिष्ठ प्रशासक और शहर अभियंता होगें। नगर निगम निकायों , स्थानीय अनुसंधान, शैक्षिक संस्थान, निवासी कल्याण संस्था, औद्योगिक और कॉरपोरेट संगठन, गैर सरकारी संगठन, राज्य क्षेत्रीय एजेन्सियां और अन्य संबंध्द पणधारकों की प्रस्तुति के साथ सलाहकार सहायता के लिए एक न्न सौर शहर पणधारक समिति का गठन किया जाएगा। विभिन्न पणधारकों जैसे नगर निगम निकायों , नगर निगम अधिकारियों, वास्तुकारोंअभियंताओं, भवननिर्माताओं, वित्तीय संस्थानों,गैर सरकारी संगठनों, तकनीकी संस्थानों, उत्पादक और आपूर्तिकर्ताओं, निवासी कल्याण संस्थाओं आदि के चयनित प्रतिनिधियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, व्यापारिक बैठकें, जागरूकता शिविर आदि और भारत में अध्ययन यात्राओं का आयोजन करना। कार्बन वित्तपोषण के लिए प्रस्ताव तैयार करना तथा प्रिंट इलेक्ट्रोनिक मीडिया के जरिए प्रचार प्रसार एवं जनजागरूकता अभियान चलाना भी इस कार्यक्रम का हिस्सा होगा। वित्तीय प्रावधान हर नगर या शहर के लिए 50 लाख रुपये तक का वित्तीय प्रावधान होगा। यह राशि उस शहर की जनसंख्या तथा संबंधित नगर परिषदप्रशासन द्वारा उठाये गये कदमों पर निर्भर करेगी। · मास्टर प्लान बनाने हेतु एक साल के अंदर 10 लाख रुपये तक का अनुदान · पांच साल के दौरान क्रियान्वयन की निगरानी के लिए 10 लाख रुपये तक का अनुदान · सौर सेल की स्थापना तथा पांच वर्षों तक उसकी क्रियाशीलता के लिए 10 लाख रुपये तक का प्रावधान · शेष पांच लाख रुपये पांच साल के अन्य प्रोत्साहन कार्यों के लिए इस मंत्रालय की विभिन्न स्कीमों के प्रावधानों के मुताबिक विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण लगाने के लिए उपभोक्ता को पूंजीइंटरेस्ट सब्सिडी दी जाएगी। स्कीम प्रावधानों के अनुसार विभिन्न अन्य गतिविधियों के लिए भी सहायता दी जाएगी। सक्षमता वाले शहर के रूप में चिन्हित शहरों को सहायता में प्राथमिकता दी जाएगी। इन शहरों को इस मंत्रालय, आईआरईडीए तथा नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणोंप्रणालियों के इस्तेमाल को बढावा देने में जुटे अन्य संस्थानों द्वारा प्राथमिकता वाले माने जायेंगे। एसएनए भी अपने शहरों में विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणप्रणाली लगाने के लिए मंत्रालय से उनकी विभिन्न स्कीमों के तहत सब्सिडी के जरिए ऊंचे लक्ष्य आवंटित करने का अनुरोध कर सकती है। शहरों के चयन की कसौटी इस कार्यक्रम के तहत उच्च स्तर की कटिबध्दता तथा नेतृत्व कौशल वाले शहरों को उत्साहवर्ध्दन किया जाता है। मंत्रालय शहरों को चयन करते वक्त निम्नलिखित बातों पर ध्यान देती है। शहर की जनसंख्या, क्षेत्रीय अवस्था एवं क्षेत्र में महत्त्व, नवीकरणीय ऊर्जाओं को अपनाने में राजनीतिक एवं प्रशासनिक कटिबध्दता (सौर शहर कार्यक्रम में वर्णित गतिविधियां को क्रियान्वित करने के लिए नगर परिषदप्रशासन द्वारा पारित किया जाने वाला प्रस्ताव), ऊर्जा संरक्षण एवं नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने के लिए उठाये गये विनियामक कदम, शहरी गतिविधियों में ऊर्जा संरक्षण तथा नवीकरणीय ऊर्जा अपनाये जाने की क्षमता, नगर परिषदप्रशासननिजी विकार्सकत्ता, उद्योगआमलोगों द्वारा ऊर्जा संरक्षण एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढावा देने के लिए पहले ही उठाये कये गदम, आम लोगों को शामिल करने में तथा हितधारकों के साथ काम करने में शहरी स्थानीय निकाय का अनुभव तथा इस कार्यक्रम के तहत शुरू की गयी गतिविधियों को संसाधन तथा स्थायित्व प्रदान करने का इरादा। प्रस्तावों की सुपुर्दगी तथा धनराशि जारी नगर परिषद द्वारा निर्धारित प्रपत्र में प्रस्ताव राज्य नोडल एजेंसी के जरिए जमा किये जायेंगे। प्रस्तावों की मंत्रालय में जांच की जायेगी और इसके आधार पर, योजना के क्रियान्वयन पर सलाह मशविरा के लिए गठित स्वतंत्र पैनल द्वारा अनुशंसित सीएफए का 50 प्रतिशत मंजूर परियोजनाओं के लिए जारी किया जाएगा तथा बाकी राशि काम के निष्पादन तथा धनराशि के इस्तेमाल के आधार पर जारी की जाएगी। पुरस्कार व्यवस्था चिन्हित सौर शहरों को वार्षिक पुरस्कार स्वरूप वैजयंतीप्रमाणपत्र प्रदान किये जाते हैं। नगर परिषदप्रशासन शहर को सौर शहर के रूप में विकसित करने के लिए उठाये गये कदमों की जानकारी प्रदान करता है और इसी आधार पर पुरस्कार दिये जाते हैं। माडल सौर शहर अन्य शहरों को सौर शहर के रूप में विकसित होने के लिए मंत्रालय उनके सम्मुख उदाहरण के तौर पर दो शहरों को सौर शहर के रूप में विकसित करेगा। इन मॉडल सौर शहरों में हरेक को इस स्कीम के तहत तैयार मास्टर प्लान कार्यान्वित करने के लिए मंत्रालय से अधिकतम साढे 9 क़रोड़ रुपये की वित्तीय मदद दी जाएगी। मंत्रालय तथा संबंधित नगर निगमनगर प्रशासनराज्य सरकार व्यय का आधा-आधा हिस्सा वहन करेगी। धनराशि तब जारी की जायेगी जब मॉडल सौर शहर के रूप में विकसित किये जाने के लिए चिन्हित शहर अपना मास्टर प्लान जमा करेगा, इसके लिए उपरोक्त नियमानुसार अलग से मदद दी जायेगी। यदि शहर को माडल सौर शहर के रूप में विकसित करने के लिए 19 करोड़ रुपये की धनराशि मंत्रालय से साढे 9 क़रोड़ रुपये तथा संबंधित नगर निगमनगर प्रशासनराज्य सरकार से भी साढे 9 क़रोड़ रुपये) प्रर्याप्त नहीं होती है तो उक्त शहर इस धनराशि के अलावा नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली लगाने के लिए मंत्रालय की अन्य मौजूदा योजनाओं से मदद ले सकता है जहां नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली उपकरण की संख्याक्षमता पर मौजूदा सीमा लागू नहीं है। # उप निदेशक, पसूका, नई दिल्ली

21 मार्च, 2009

पुलिस पर बिजली चोरी का आरोप है।

मुंबई पुलिस अपराधियों को पकड़ने के साथ खुद भी चोरी का काम शुरू कर चुकी है। पुलिस पर बिजली चोरी का आरोप है। यह नायाब तरीका मुंबई में करीब 88 पुलिस चौकियों में वर्षों से आजमाया जा रहा है। एक चौकी तो ऐसी है कि 2001 से अब तक सिर्फ सात यूनिट ही खर्च कर पाई है।मुंबई पुलिस के मरीन ड्राइव ट्रैफिक पुलिस चौकी पर एक विज्ञापन बोर्ड 2001 से लगा है। इसमें 2001 से इलेक्ट्रिक सप्लाई दी जा रही है लेकिन तब से अब तक यह मीटर मात्र सात यूनिट ही बता रहा है। आई के चौगानी ने इस विज्ञापन बोर्ड को लेकर एक अपील बंबई हाईकोर्ट में डाली है। अपील में उन्होने कहा है कि करीब तीन-चार सप्ताह से मैं मरीन ड्राईव चौकी के मीटर को देख रहा हूं वह सात यूनिट ही है। जबकि यहां पर विज्ञापन बोर्ड दिन-रात रौशन रहता है। इसलिए मुझे शक है कि बिजली की यहां चोरी की जा रही है। चौगानी ने मुंबई के अन्य पुलिस चौकियों पर भी आरोप लगाया है कि शहर में कई पुलिस चौकियां अवैध रूप से स्ट्रीट लाइट और ट्रैफिक सिग्नल से बिजली की चोरी कर इस्तेमाल कर रही है।इस अपील के जवाब में बेस्ट के सहायक जेनरल मैनेजर अशोक वासुदेव ने कहा कि वह मीटर एक आउटडोर कंपनी के नाम पर लगाया गया था लेकिन इस अपील के बाद हमने मीटर बदल दिया है और पुराने मीटर को जांच के लिए भेज दिया गया है। यहीं नहीं इसमें 88 पुलिस चौकियों की लंबी फेहरिस्त है जो कि बिजली की चोरी करते हैं। इनमें से 42 चौकियों के खिलाफ कदम उठाये गए हैं, इन चौकियों में अवैध रूप से बिजली का उपयोग किया जा रहा था और 16 चौकियां ऐसी थी जो कि बिना मीटर के बिजली का उपयोग रहीं थीं।

09 मार्च, 2009

स्वीडन फिर बनाएगा परमाणु बिजली

स्वीडन फिर बनाएगा परमाणु बिजली फिर सक्रिय होंगे परमाणु रिएक्टर यूरोपीय संघ के कई सदस्यों ने स्वीडन के फिर से परमाणु बिजली बनाने के फ़ैसले पर एतराज़ जताया है. स्वीडन ने 30 साल की पाबंदी के बाद परमाणु रिएक्टर फिर खोलने की बात कही है. यूरोपीय देशों को चिंता इस बात की लगी है कि स्वीडन के फ़ैसले से पूरे महाद्वीप में एक ग़लत संदेश जा सकता है. जहां एक तरफ़ परमाणु रिएक्टरों को बंद करने की बात चल रही है, वहीं दूसरी तरफ़ स्वीडन तीस साल बाद परमाणु बिजली पर लगी पाबंदी हटा रहा है. यूरोपीय संघ में ग्रीन पार्टी की सांसद जर्मनी की रेबेका हार्म्स इसे स्कैंडल बता रही हैं. यूरोपीय संघ के सदस्य स्वीडन में जनमत संग्रह के बाद 1980 में ही तय किया गया कि वहां परमाणु रिएक्टर बंद होंगे और परमाणु बिजली की पैदावार भी धीरे धीरे ख़त्म हो जाएगी. हालांकि लगभग 30 साल बाद भी आधी से ज़्यादा बिजली परमाणु रिएक्टरों में ही पैदा की जाती है. सरकार ने दस रिएक्टरों को बदल देने का फ़ैसला किया है. ख़ुद स्वीडन की विपक्षी पार्टियां भी इसका विरोध कर रही हैं. लेकिन स्वीडन सरकार का कहना है कि आर्थिक मंदी के इस दौर में उसके फ़ैसले से रोज़गार बढ़ेगा और निवेश को भी बढ़ावा दिया जा सकेगा. प्रधानमंत्री फ़्रेडरिक राइनफ़ेल्ड्ट का मानना है कि कुछ ख़तरों के बावजूद लोग परमाणु बिजली में भरोसा रखते हैं और इस दिशा में सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा. परमाणु बिजली से जुड़ा सबसे ख़तरनाक हादसा पूर्व सोवियत संघ के चेरोनबिल में हुआ था, जहां से ज़हरीली गैस लीक होने से कई लोगों की मौत हो गई थी और उसका असर अब तक देखा जाता है. इसके बाद से ही दुनिया भर में परमाणु रिएक्टरों को बंद करने की मुहिम चली थी. जर्मनी में भी दो हज़ार बीस तक इसे बंद करने का प्रस्ताव है. स्वीडन के इस फ़ैसले के बाद परमाणु

27 जनवरी, 2009

बिजली बचाने के कुछ और गुर

ओवन , प्रेस , वाशिंग मशीन का एकजाई उपयोग ओवन , प्रेस , वाशिंग मशीन जैसे उपकणों की क्षमता के अनुरूप कार्य एकत्रित कर लें फिर एक ही बार में मशीन का पूरा आप्टिमम उपयोग करे . देखिये कि कितनी बिजली बची ? खिड़कियों की काँच में ट्राँसपेरेंट फिल्म लगावें घर की खिड़कियों के कांच में ट्रांस्पेरेंट फिल्म का उपयोग कर ४ल्ट्रावायलेट किरणौ को बाहर ही रोक दें , अनुभव कीजीये कि घर के तापमान में कितना अंतर होता है ! फाल्स सीलिंग यदि घर में वातानुकूलन यंत्रो का उपयपग कर रहे हैं तो फाल्स सीलिंग अवश्य करवाइये , शीतलन का वाल्यूम कम होते ही बिजली का बिल भी कम हो जायेगा .

26 जनवरी, 2009

सीएफ़एल की जगह एलईडी बत्तियाँ

सीएफ़एल की जगह एलईडी बत्तियाँ बत्ती निर्मता और शोधकर्ता इस समय और भी बेहतर विकल्पों की तलाश में हैं. संक्षेप में LED यानी Light Emitting Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift: प्रकाश उत्सर्जी डायोड वाली LED बत्तीDiode कहालाने वाले प्रकाश उत्सर्जी डायोड एक ऐसा ही विकल्प हो सकते हैं. अमेरिका में सैंटा बार्बरा विश्वविद्यालय के भौतिकशास्त्री शूजी नाकामूरा का कहना है कि LED वाली बत्तियां इस समय की बिजली बचतकारी बत्तियों की अपेक्षा दुगुनी कार्यकुशल हैं: "प्रकाश उत्सर्जक डायोड की ऊर्जा-कार्यकुशलता बहुत ऊंची है--क़रीब 50 प्रतिशत. इसका मतलब है कि यह डायोड इस्तेमाल हुई बिजली की आधी मात्रा को प्रकाश में बदल देता है. LED बत्तियों की सहायता से हम कहीं ज़्यादा बिजली बचा सकते हैं." एलईडी इलेक्ट्रॉनिक चिप है प्रकाश उत्सर्जी डायोड अपने आप में एक छोटा-सा इलेक्ट्रॉनिक चिप है. चिप में से बिजली गुज़रते ही उसके इलेक्ट्रॉन पहले तो आवेशित हो जाते हैं और फिर, लगभग तुरंत ही, अपने आवेश वाली ऊर्जा को प्रकाश के रूप में उत्सर्जित कर देते हैं. इस तरह वे विद्युत ऊर्जा को प्रकाश ऊर्जा में बदलते हैं. स्टीरियो सिस्टम में हम जो छोटी-छोटी लाल-पीली़-हरी बत्तियां टिमटिमाते देखते हैं, वे प्रकाश उत्सर्जक डॉयोड ही हैं. शूजी नाकामूरा ने ही 1990 वाले दशक में सफ़ेद रोशनी देने वाले Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift: LED चिपप्रकाश उत्सर्जी डायोड के निर्माण की आधारशिला रखी. यही डायोड अब घरों और सड़कों को भी जगमग करेगाः "प्रकाश उत्सर्जी डायोड लगभग अमर होते हैं, क़रीब एक लाख घंटे का उनका जीवनकाल होता है. एक साधारण बल्ब औसतन केवल एक हज़ार घंटे तक ही चल पाता है. लाइट डायोड उतने गरम भी नहीं होते, जितना एक बल्ब गरम हो जाता है. उनमें कोई पारा या कोई दूसरी विषैली चीज़ भी नहीं होती." इधर कुछ वर्षों से बाज़ार में प्रकाश उत्सर्जी डायोड वाली LED हाथबत्तियां और साइकल की बत्तियां भी मिल रही हैं. लेकिन, ब्रेमेन के भौतिक वैज्ञानिक डेटलेफ़ होमल का कहना है कि वे अभी इतना तेज प्रकाश नहीं दे पातीं कि कारों या घरों में भी इस्तेमाल हो सकें: "LED से कारों की हेडलाइट बनाने के लिए आख़िरी सीमा तक जाना पड़ेगा. यहाँ भौतिक विज्ञान की अभी कई चुनौतियाँ हमारे सामने हैं." प्लास्टिक करेगा घरों को जगमग प्रकाश उत्सर्जी डायोड वाली LED बत्तियाँ अभी बहुत मंहगी भी हैं. व्यापक इस्तेमाल लायक बनने के लिए उन्हें सस्ता होना पड़ेगा. इस बीच उनका भी एक विकल्प प्रयोगशालाओं में तैयार हो रहा है-- ऐसे प्रकाश उत्सर्जी प्लास्टिक अणु, जिन्हें Organic Light Emitting Diodes --OLED या केवल ओलेड भी कहते हैं. उनकी सहायता से बिल्कुल नये प्रकार की बत्तियाँ और लैंप बनाये जा Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift: प्लास्टिक का बना प्रकाश उत्सर्जी डायोड OLEDसकते हैं, जैसाकि कार्ल्सरूहे विश्वविद्यालय के भौतिक वैज्ञानिक ऊली लेमर बताते हैं: "उनसे काफ़ी लंबे-चौड़े और मनचाहे आकार वाले ऐसे प्रकाश-स्रोत बन सकते हैं, जिन्हें घर की बनावट के साथ एकाकार किया जासके. उदाहरण के लिए, वे पूरी दीवार या पूरी छत तक फैले हो सकते हैं." लेकिन, इस जगमगाहट के आने में अभी समय है हालाँकि ओलेड स्क्रीन वाले टेलीविज़न सेट बाज़ार में आ गये हैं: "एक सबसे बड़ा सवाल है कि ओलेड वाले प्रकाश-स्रोत कितनी कम बिजली खा कर कितना अधिक प्रकाश देंगे और कितने टिकाऊ होंगे. उनका उत्पादन इतना सरल नहीं है कि उन्हें सस्ता कहा जा सके. उनका मुकाबला टॉमस एडीसन के उस बल्ब से है, जिसे एक सदी से अधिक समय से परिष्कृत और परिमार्जित किया जाता रहा है और जिसे अरबों की संख्या में बेहद सस्ते दाम पर बनाया जा सकता है." दूसरे शब्दों में, जगमग करते प्लास्टिक वाली बत्तियां बाज़ार में आने में अभी एक-आध दशक लग जायेंगे.

अपराधों के नियंत्रण हेतु गाड़ियों की नम्बर प्लेट अलग न होने वाली हों..

हमेशा बिजली को लेकर ही लिखता रहता हूँ , विचार आया वाहनो के पंजियन पर तो उसे भी बाँट लूँ आप सब से .अपने माननीय मुख्य मंत्री जी ने http://www.ideasforcm.in/ नाम से एक बहुत ही बढ़िया शुरुवात की है , सो उन्हें भी यह विचार जमा कर रहा हूँ . अपराधों के नियंत्रण हेतु गाड़ियों की नम्बर प्लेट अलग न होने वाली हों..अपराध नियंत्रण में वाहनो के रजिस्ट्रेशन नम्बर की भूमिका स्वस्पष्ट है . ज्यादातर आतंकवादी गतिविधियाँ , हिट एण्ड रन एक्सीडेंटंल अपराध , वाहनों की चोरी , डकैती , कार में बलात्कार आदि आपराधों के अनुसंधान में प्रयुक्त वाहनों के रजिस्ट्रेशन नम्बर से पोलिस को बड़ी मदद मिलती है . वर्तमान में यह रजिस्ट्रेशन नम्बर एक दो या तीन स्क्रू से कसी हुई नम्बर प्लेट पर लिखा होता है . जिसे अपराधी बड़ी सरलता से निकाल फेंकता है या नम्बर प्लेट बदलकर चोरी की गाड़ी से अपराध को अंजाम देता है . मेरा सुझाव है कि इस पर नियंत्रण हेतु वाहन की चेसिस व बाडी पर ही निर्माता कम्पनी द्वारा फैक्टरी में ही रजिस्ट्रेशन नम्बर एम्बोसिंग द्वारा अंकित करने की व्यवस्था सरकारे तय करें . उस नम्बर का वाहन किस व्यक्ति द्वारा खरीदा गया यह विक्रय के बाद रजिस्ट्रेशन अथारिटी अपने कम्प्यूटर पर दर्ज कर रजिस्ट्रेशन शुल्क आदि लेकर दर्ज कर ले . इससे अपराधी सुगमता से वाहन का नम्बर नहीं बदल पायेंगे .सरकार को गाड़ी निर्माताओं को उनके उत्पादन के अनुरूप रजिस्ट्रेशन नम्बर पहले ही अलाट करने होंगे . इससे नये खरीदे गये अनरजिस्टर्ड वाहनों से घटित अपराधों पर भी नियंत्रण हो सकेगा .सरकारो के द्वारा वर्षो पुराने वाहन रजिस्ट्रेशन कानून में सामयिक बदलाव की इस पहल से गाड़ियों की चोरी में कमी के आंकड़े , अपराधों मे वाहनो के उपयोग में कमी के आंकड़े अपराध , आतंकवाद में कमी होगी, आम नागरिक , पोलिस व अन्य अपराध नियंत्रण संस्थायें राहत अनुभव करेंगी .

No more street light in Small Township

No more street light in Small Township Providing very high heavy single light source, instead of street lights In small industrial townships, instead of providing number of street lights, if the colony is developed in circular shape in such a way that the inner buildings are of less height than buildings of outer periphery, instead of providing street lighting, a single high mast powerful light source can be provided . It can save electricity , & colony may feel like day light even in nights… this is my idea.